Success Story : बालोतरा जिले के गिड़ा क्षेत्र के करालिया बेरा गांव के करीम खान ने संघर्ष, अभाव और असफलताओं से लड़ते हुए व्याख्याता भर्ती परीक्षा 2024 में 174वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो हालात भी रास्ता नहीं रोक सकते।
Success Story : कभी बकरियों के साथ खुले आसमान तले सपने देखने वाला एक बालक, आज उसी आसमान को अपनी मेहनत से छू चुका है। बालोतरा जिले के गिड़ा क्षेत्र के करालिया बेरा गांव के करीम खान ने संघर्ष, अभाव और असफलताओं से लड़ते हुए व्याख्याता भर्ती परीक्षा 2024 में 174वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो हालात भी रास्ता नहीं रोक सकते।
ग्राम पंचायत करालिया बेरा निवासी करीम खान साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता जमालुद्दीन बकरी चराने का कार्य करते हैं। करीम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के चुतरानाडा विद्यालय से प्राप्त की, जबकि उच्च प्राथमिक शिक्षा के लिए उन्हें प्रतिदिन करीब 9 किलोमीटर दूर नवातला तक पैदल आना-जाना पड़ता था। इसके बाद उन्होंने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खोखसर से दसवीं तथा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पाटोदी से 12वीं की शिक्षा प्रथम श्रेणी में पूरी की।
आर्थिक तंगी के बावजूद करीम खान ने हार नहीं मानी। उन्होंने बालोतरा की फैक्ट्रियों में काम करते हुए स्वाध्यायी के रूप में स्नातक और जेएनवीयू जोधपुर से बी.एड की पढ़ाई पूरी की। पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ वे लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहे।
कई बार असफलता मिली, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। वर्ष 2018 में हिंदी विषय से अध्यापक भर्ती में लेवल-2 में चयन हुआ और वर्तमान में वे राजकीय प्राथमिक विद्यालय ताजपुरा, जवाहरपुरा (पाटोदी) में कार्यरत हैं।
लंबे समय तक चयन नहीं होने से निराशा के दौर भी आए, लेकिन करीम ने धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखा। वर्ष 2022 की व्याख्याता भर्ती और कॉलेज लेक्चरर परीक्षा में असफल रहने के बावजूद उन्होंने प्रयास जारी रखा।
आखिरकार 2024 में 174वीं रैंक हासिल कर उन्होंने अपने संघर्ष को सफलता में बदल दिया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, धर्मपत्नी, गुरुजनों और मित्रों को दिया, जिन्होंने हर कठिन परिस्थिति में उनका साथ दिया।
सिंधी मुस्लिम समाज में शिक्षा के क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों के बीच करीम खान की यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि संसाधनों की कमी के बावजूद मेहनत और लगन से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।
मंडल अध्यक्ष दिने खान खोखसर ने इसे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताते हुए कहा कि यह सफलता साबित करती है कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।