
बाड़मेर। जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सीमावर्ती इलाके के एक सरकारी स्कूल में पहुंचकर शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने रखी। राजकीय प्राथमिक विद्यालय थानाणी, ग्राम द्राभा, गड़रारोड में बच्चों के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाने पहुंचे भाटी ने स्कूल की स्थिति का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था और सरकारों की कार्यप्रणाली को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।
रविंद्र सिंह भाटी ने अपने एक्स हैंडल पर वीडियो साझा करते हुए बताया कि वह भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 15 से 20 किलोमीटर अंदर स्थित एक ऐसे विद्यालय में 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, जो घास-फूस के झोपड़े में संचालित हो रहा है। वीडियो में स्कूल की स्थिति दिखाते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के 80 साल बाद भी देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ने के लिए बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।
भाटी ने कहा कि यह सवाल केवल एक स्कूल का नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था का है। उन्होंने पूछा कि आजादी के 80 साल बाद क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था वास्तव में सही दिशा में आगे बढ़ रही है? उन्होंने जयपुर और दिल्ली में बैठे लोगों से सवाल करते हुए कहा कि क्या वे अपने बच्चों को ऐसे विद्यालय में पढ़ने के लिए भेजेंगे।
विधायक ने पिछले कई दशकों में सत्ता में रही सरकारों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आखिर 80 वर्षों में इन विद्यालयों के लिए क्या किया गया? एक तरफ देश को विश्वगुरु बनाने की बात होती है, चांद तक पहुंचने और बड़ी उपलब्धियों का जिक्र किया जाता है, लेकिन दूसरी तरफ देश के बच्चे आज भी घास-फूस के स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं।
रविंद्र सिंह भाटी ने 'राइजिंग राजस्थान' और 'वर्ष 2047 तक विकसित भारत' के लक्ष्य का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि जब राजस्थान में बड़े निवेश और विकास की बातें हो रही हैं तथा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है, तो क्या ऐसी स्कूल व्यवस्था के साथ यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है?
उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं को मजबूत करना जरूरी है, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के भविष्य को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने स्कूल की स्थिति को गंभीर विषय बताते हुए पूछा कि क्या ऐसी परिस्थितियां शर्मनाक नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। वीडियो में बच्चे भारत माता की जय के नारे लगाते हुए भी नजर आए।
भाटी के वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग सरकारों से सवाल कर रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स ने विधायक की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 'करीब ढाई साल से विधायक रहने के दौरान यदि भाटी इस विद्यालय के लिए एक-दो कमरे बनवाकर वहीं स्वतंत्रता दिवस मनाते तो यह ज्यादा बेहतर होता।'
अब यह वीडियो सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर तेजी से साझा किया जा रहा है। एक तरफ लोग सीमावर्ती क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की स्थिति और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाटी से भी पूछा जा रहा है कि जनप्रतिनिधि के तौर पर वे इस स्कूल की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाएंगे। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस पर सामने आया यह वीडियो शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी को लेकर भी नई बहस खड़े कर रहा है।