बाड़मेर

Barmer: सीएसआर फंड में ‘बंदरबांट’, प्रभावित गांवों को नजरअंदाज किया, सियासी दबाव में बंटा बजट

Barmer Mining CSR Fund: बाड़मेर में माइंस क्षेत्र के सीएसआर फंड के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि प्रभावित गांवों को नजरअंदाज कर सियासी दबाव में बजट का बंटवारा किया गया।

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Apr 04, 2026
क्षतिग्रस्त स्कूल। फोटो- पत्रिका

बाड़मेर। राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल लिमिटेड (आरएसएमएमएल) की गिरल व सोनड़ी माइंस क्षेत्र में सीएसआर फंड के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि प्रभावित गांवों की अनदेखी कर फंड का मनमाने तरीके से बंटवारा किया गया, जबकि वास्तव में प्रभावित बाशिंदे बुनियादी सुविधाओं, सड़क और स्कूल के लिए तरसते रह गए।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भाजपा महामंत्री के पत्र के आधार पर गैर-प्रभावित क्षेत्र नींबला के हेमानाडा में 25 लाख रुपए का बजट स्वीकृत कर दिया गया। वहीं बाड़मेर गादान ग्राम पंचायत, जहां चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल की पत्नी सरपंच हैं, वहां भी 23 लाख रुपए का प्रावधान किया गया। इससे सीएसआर फंड के आवंटन में सियासी प्रभाव के आरोप और गहरे हो गए हैं। जबकि शिव विधायक रविंद्रसिंह भाटी ने जालिला गांव में विकास कार्यों की स्वीकृति के लिए पत्र लिखा था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके विपरीत राजनीतिक पदाधिकारियों के पत्रों पर तुरंत बजट जारी होने से सवाल खड़े हो गए हैं।

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प्रभावित क्षेत्रों को दरकिनार

गिरल माइंस का संचालन जालिला राजस्व गांव में हो रहा है, जबकि कोटड़ा ग्राम पंचायत इस परियोजना से सर्वाधिक प्रभावित मानी जाती है। इसके बावजूद कोटड़ा में केवल 5 कार्य स्वीकृत किए गए, जिनकी कुल लागत महज 18 लाख रुपए है। इसके विपरीत आकली ग्राम पंचायत में 21 कार्यों को मंजूरी दी गई, जिनमें एक कार्य की अनुमानित लागत ही 40 लाख रुपए तक है। ग्रामीणों का कहना है कि यह वितरण न तो पारदर्शी है और न ही प्रभावित क्षेत्रों की प्राथमिक जरूरतों के अनुरूप है।

सड़क के लिए सालभर से संघर्ष

कोटड़ा और जालिला के बीच सड़क आज भी अधूरी है। यह मार्ग माइंस गतिविधियों के कारण सबसे अधिक प्रभावित है, लेकिन इसके निर्माण के लिए अब तक कोई बजट स्वीकृत नहीं हुआ। ग्रामीणों ने कई बार आंदोलन और ज्ञापन दिए, लेकिन नतीजा शून्य रहा।

शिक्षा पर भी संकट

सोनड़ी माइंस क्षेत्र में खेजड़ली नाडी का राजकीय प्राथमिक विद्यालय अवाप्त भूमि में आ गया था। भवन जर्जर होने के कारण इसे दूसरे स्कूल में मर्ज कर दिया गया। वर्तमान में कक्षाएं निजी भवन में संचालित हो रही हैं। ग्रामीणों ने नई जमीन उपलब्ध करवा दी, लेकिन कंपनी की ओर से न तो निर्माण के लिए बजट दिया गया और न ही जमीन आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों का दर्द

सोनड़ी माइंस में स्कूल अवाप्त होने और जर्जर हालात के कारण उसे मर्ज कर दिया गया, लेकिन कंपनी ने न जमीन दी और न बजट। ग्रामीणों ने जमीन दे दी, फिर भी निर्माण शुरू नहीं हुआ, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

  • पूनमाराम, खेजड़ली, स्थानीय निवासी

माइंस हमारे गांव में चल रही है, लेकिन हमें बुनियादी सड़क तक नहीं मिली। दूसरी जगहों पर मनमाने तरीके से बजट खर्च हो रहा है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों को छोड़ अन्य जगह पैसा दिया गया है।

  • कमलसिंह, जालिला, स्थानीय निवासी

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