बाड़मेर

डिजाइन पर उतरा अजमेर के ऐतिहासिक तारागढ़ फोर्ट का रोप-वे

अरावली पर्वतमाला के ऊंचे पर्वत शिखर पर बना है तारागढ़, एनओसी के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को डिजाइन सौंपी, दो साल से अटके रोप-वे प्रस्ताव को मिली गति

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तीर्थगुरू पुष्करराज के बाद अब धार्मिक नगरी अजमेर में भी रोप-वे का रोमांच बिखरेगा। दो साल से अटके रोप-वे के प्रस्ताव को अब गति मिली है। यह रोप-वे ऐतिहासिक स्थल अढ़ाई दिन के झौपड़े से तारागढ़ फोर्ट तक लगाया जाना प्रस्तावित है। रोप-वे निर्माण करने वाली कोलकाता की फर्म ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के जोधपुर मंडल को रोप-वे निर्माण की डिजाइन सौंपते हुए एनओसी मांगी है। फर्म को अनुमति मिलने के बाद जमीन अवाप्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

ज्ञात है कि तीर्थगुरू पुष्कर में सावित्री माता मंदिर पहाड़ी तक रोप-वे निर्माण करने वाली फर्म दामोदार रोप-वे इन्फ्रा लिमिटेड कम्पनी ने दो साल पहले करीब 885 मीटर ऊंचे पर्वत शिखर पर बने ऐतिहासिक गढ़बिठली यानि तारागढ़ फोर्ट तक रोप-वे बिछाने का प्रस्ताव जिला कलक्टर को दिया था। लेकिन सावित्री मंदिर पुष्कर के रोप-वे निर्माण में देरी के कारण तारागढ़ के रोप-वे प्रस्ताव को गति नहीं मिली। सावित्री मंदिर रोप-वे का शुभारम्भ होने के बाद फर्म ने तारागढ़ के रोप-वे के प्रोजेक्ट पर फोकस किया। चूंकि अढ़ाई दिन का झौपड़ा व तारागढ़ का मुख्य द्वार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से संरक्षित श्रेणी में शामिल है। इसलिए जिला कलक्टर अजमेर ने प्रस्ताव को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की एनओसी के लिए जोधपुर मंडल को भेजा।

कुछ दिन पहले फर्म के प्रतिनिधियों ने जोधपुर मंडल अधिकारियों को रोप-वे की प्रारम्भिक डिजाइन सौंपी। इस डिजाइन के अनुसार अढ़ाई दिन के झौंपड़े से करीब 443 मीटर दूरी पर आम का तालाब के पास रोप-वे का प्रथम भूतल स्ट्रेक्चर तथा तारागढ़ मुख्य द्वार से करीब 127 मीटर की दूरी पर अन्तिम स्ट्रेक्चर बनाया जाना है। चूंकि यह स्ट्रेक्चर गेट-वे ऑफ तारागढ़ से निर्धारित 300 मीटर के दायरे में हैं। इसलिए रोप-वे का निर्माण पुरातत्व विभाग की गाइडलाइन से होगा।

जोधपुर मंडल के अधीक्षक ने फर्म से डिजाइन के तहत विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट के बाद राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण दिल्ली की ओर से एनओसी जारी की जाएगी।

इसलिए खास है तारागढ़ फोर्ट पर रोप-वे

ज्ञात है कि अजमेर का ऐतिहासिक तारागढ़ फोर्ट देश के अभेद्य दुर्गों में से एक माना जाता है। इस गौरवशाली इतिहास वाले दुर्ग ने कालान्तर में कई आक्रांताओं के आक्रमण झेले हैं। दुर्ग के एक-एक बुर्ज पर इतिहास की गाथाएं छिपी है। धार्मिक पर्यटन के कारण हर साल लाखों पर्यटक अजमेर आते हैं। देश-दुनिया तक प्रसिद्ध सैय्यद मीरा साहब की दरगाह भी इसी तारागढ़ फोर्ट पर बनी है। लेकिन पर्वत शिखर तक पहुंच मुश्किल होने के कारण अधिकत्तर पर्यटक तारागढ़ देखे बिना ही लौट जाते हैं। यहां यह भी विशेष हैं कि अरावली की सुरम्य पहाडिय़ों से घिरे अजमेर शहर का अनुपम सौन्दर्य तारागढ़ की चोटी से ही दिखाई देता है।

इनका कहना है-

रोप-वे बनाने वाली कम्पनी ने अजमेर के तारागढ़ किले के द्वार तक रोप-वे बनाने की डिजाइन विभाग को दी है। उस डिजाइन के आधार पर कम्पनी से डिटेल रिपोर्ट मांगी गई है। एनओसी की प्रक्रिया दिल्ली कार्यालय से जारी होगी।

-एस. के. गुप्ता,सहायक पुरातत्व अभियंता, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, जोधपुर मंडल

Published on:
23 Apr 2017 06:51 pm
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