बाड़मेर के रड़वा गांव की घटना, 2013 में हुई थी घटना, पांच साल बाद मिली आरोपियों को सजा, घटना के बाद पीडित परिवार को छोडना पड़ा था गांव
बाड़मेर. पोक्सो प्रकरण की विशिष्ट न्यायाधीश ने साढ़े पांच साल पहले एक ग्यारह वर्षीय मासूम का षडयंत्रपूर्वक अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म करने और उसके बाद पहाडि़यों से गिराकर नृशंस हत्या करने करने के दो मुख्य आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई और इनका साथ देखकर पीडि़त परिवार अनुचित दबाव बनाने वाले तीन अन्य आरोपियों को सात-साल साल की सजा सुनाई। पांचों आरोपित एक ही परिवार के है।
सदर थाना क्षेत्र के रड़वा गांव में 29 मार्च 2013 की रात 11 वर्षीय नाबालिग को आरोपी घेवरसिंह पुत्र प्रहलादसिंह निवासी एवं श्रवणङ्क्षसह पुत्र कूंपसिंह निवासी नीम्बड़ी अपकरण कर ले गए। पहाडि़यों में लेजाकर मासूम के साथ दुष्कर्म किया और फिर इसको पहाडि़यों से फेंककर हत्या कर दी। वारदात में शामिल आरोपी श्रवणसिंह के पिता प्रहलादसिंह पुत्र शिवनाथसिंह, नरसिंग पुत्र शिवनाथसिंह एवं शंकरसिंह पुत्र हरचंदसिंह ने आरोपियों के अपराध को छुपाने के लिए साथ दिया और परिवार पर अनुचित दबाव डालकर प्रताडि़त किया। मामला महिला थाने में दर्ज किया गया। इस मामले में मंगलवार को पोक्सो प्रकरण की विशिष्ट न्यायाधीश वमितासिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य आरेापी घेवरसिंह एवं श्रवणसिंह को फांसी की सजा सुनाई। आरोपी के पिता प्रहलादसिंह, नरसिंगसिंह एवं शंकरसिंह को सात-सात साल के कठोर कारावास के आदेश दिए। पीडि़त पक्ष की पैरवी एडवोकेट करनाराम चौधरी ने की।
गांव छोडऩा पड़ा पीडि़ता के परिवार को
पीडि़ता का परिवार गांव के कमजोर तबके से होने से अनुचित दबाव इतना बढ़ा कि गांव छोडऩा पड़ा। मामले को लेकर काफी आक्रोश रहा। बालिका के शव का अंतिम संस्कार भी बाड़मेर शहर में ही किया गया था, शव को गांव नहीं लेकर गए।
बाड़मेर का पहला मामला
पोक्सो एक्ट के तहत यह बाड़मेर का पहला मामला है जिसमें फंासी की सजा सुनाई गई है। पांचों आरोपित जमानत पर थे जिनको 6 अगस्त को दोषी करार दिया गया और 7 अगस्त को फैसला सुनाया गया है। -सवाई माहेश्वरी, अपर लोक अभियोजक विशिष्ट न्यायालय पोक्सो एक्ट