प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे, लेकिन प्रदेश भाजपा और मुख्यमंत्री के सामने 'अक्षय तृतीया' के बंपर सावे ने 2 लाख की भीड़ जुटाने का संकट खड़ा कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 21 अप्रैल को होने वाली पचपदरा रिफाइनरी उद्घाटन सभा प्रदेश भाजपा और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के लिए साख का सवाल बन गई है। एक ओर राजस्थान के औद्योगिक इतिहास का सबसे बड़ा पन्ना लिखा जाना है, तो दूसरी ओर मारवाड़ सहित पूरे प्रदेश में शादियों के 'अबूझ सावे' ने सरकार और संगठन के पसीने छुड़ा दिए हैं। 2 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य अब एक ऐसी चुनौती बन गया है, जिससे पार पाना स्थानीय नेताओं के लिए 'लोहे के चने चबाने' जैसा है।
राजस्थान में 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया का अबूझ सावा है, जिसके बाद 20 और 21 अप्रैल को भी प्रदेशभर में बंपर शादियां हैं। आलम यह है कि हर घर में 5 से 10 शादी के कार्ड आ चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में घनिष्ठ संबंधों की शादियों को छोड़ना सामाजिक नाराजगी का कारण बनता है। ऐसे में कार्यकर्ताओं और आम जनता को पचपदरा तक लाना भाजपा के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है।
बता दें कि पीएम मोदी की जनसभा में दो लाख लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पार्टी ने प्रदेश से लेकर बूथ स्तर तक पदाधिकारियों, मंत्रियों, विधायकों और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने प्रधानमंत्री की जनसभा को सफल बनाने के लिए 12 जिलों में कार्यक्रम प्रभारी नियुक्त किए हैं।
वहीं, दूसरी ओर बालोतरा जिले में भी संगठन सक्रिय है। उद्योग मंत्री केके विश्नोई, पचपदरा विधायक डॉ. अरुण चौधरी, सिवाना विधायक हमीर सिंह भायल सहित पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक भी अपना दायित्व निभा रहे हैं। जिला मीडिया प्रभारी राजेश पुरी ने बताया कि भाजपा जिलाध्यक्ष भरत मोदी के नेतृत्व में 16 मंडलों के अध्यक्ष, प्रभारी और जिला टीम पदाधिकारी भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
प्रदेश संगठन की ओर से 12 जिलों में कार्यक्रम प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। इनमें बालोतरा में भूपेन्द्र सैनी, बाड़मेर में विजेन्द्र पूनिया, जैसलमेर में कैलाश मेघवाल, जोधपुर शहर में नाहर सिंह जोधा, जोधपुर दक्षिण में मुकेश दाधीच, जोधपुर उत्तर में महेन्द्र कुमावत और पाली में अजीत मांडन को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वहीं, जालोर में महेन्द्र बोहरा, सिरोही में छगन माहूर, राजसमंद में नारायण मीना, नारायण पुरोहित, नागौर में रघुनाथ नरेडी और बीकानेर में मिथिलेश गौतम को जिम्मेदारी दी गई है। ये सभी प्रभारी संबंधित जिलों में बैठकों के माध्यम से आमजन की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।
सांसदों और विधायकों के सामने स्थिति और भी गंभीर है। शादियों के सीजन में एक-एक जनप्रतिनिधि को दिन भर में 15 से 20 समारोहों में हाजिरी लगानी होती है। यदि वे नहीं जाते, तो कार्यकर्ता की नाराजगी वोट बैंक पर भारी पड़ती है। अब आलाकमान के निर्देश हैं कि सभा में आना अनिवार्य है। ऐसे में नेताजी अपने कार्यकर्ताओं को फोन कर सफाई दे रहे हैं— "सभा के बाद आपके यहाँ पक्का हाजिर हो जाऊंगा।"
भीड़ जुटाने के गणित में सबसे बड़ी बाधा 'परिवहन' की है। शादियों के कारण निजी बसें और छोटे वाहन महीनों पहले से बुक हो चुके हैं। प्रधानमंत्री की सभा के लिए 15 जिलों से लोगों को लाना है, जिसके लिए हजारों बसों की जरूरत है। परिवहन विभाग और भाजपा के रणनीतिकार अब इस उलझन में हैं कि अगर बारात की बसें सभा के लिए अधिगृहित की गईं, तो जनता का गुस्सा फूट सकता है और यदि बसें नहीं मिलीं, तो 3 बड़े डोम खाली नजर आएंगे।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 21 अप्रैल को वैशाख शुक्ल पंचमी है, जो आदिगुरु शंकराचार्य की जयंती का दिन है। पंडित सुनील जोशी के अनुसार, यह मुहूर्त रिफाइनरी और राजस्थान की प्रगति के लिए अत्यंत श्रेयस्कर है। रिफाइनरी जैसे महाप्रोजेक्ट का श्रीगणेश इस श्रेष्ठ मुहूर्त में होना प्रदेश के भाग्य को चमकाने वाला माना जा रहा है।
भाजपा ने इस सभा को भव्य बनाने के लिए पूरा जोर लगा दिया है: