बस्तर

Employment Crisis: नक्सल मुक्त बस्तर में अब नई चुनौती, 2.17 लाख युवा बेरोजगार ग्रीधारी सबसे ज्यादा परेशान

बस्तर में 2.17 लाख से अधिक युवा बेरोजगार हैं। तकनीकी और स्नातक डिग्रीधारी सबसे ज्यादा रोजगार की तलाश में हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब रोजगार सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
2 min read
• •
Updated: 17 Jul 2026, 2:49 PM IST
School Lock Protest:
School Lock Protest:

Bastar Employment Crisis: कभी बस्तर में नक्सलवाद को युवाओं के भविष्य की सबसे बड़ी बाधा माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। सुरक्षा हालात बेहतर होने के बावजूद रोजगार के मोर्चे पर यहां की हालात ङ्क्षचताजनक हैं। संभाग के सातों जिलों में 2 लाख 17 हजार 480 पंजीकृत बेरोजगार रोजगार कार्यालयों में नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सबसे अधिक ङ्क्षचता की बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या तकनीकी और उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं की है।

रोजगार के नए अवसर

इससे साफ है कि शिक्षा का स्तर तो बढ़ा है, लेकिन रोजगार के अवसर उसी गति से नहीं बढ़ पाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उद्योग, पर्यटन, कृषि आधारित प्रसंस्करण, वन उत्पाद और स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार के नए अवसर तेजी से विकसित नहीं किए गए तो शिक्षित युवाओं का पलायन बढ़ सकता है। सरकार के पास नक्सलवाद से उबरते बस्तर के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा नहीं, बल्कि युवाओं को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना है।

तकनीकी शिक्षित बेरोजगार अधिक

आंकड़ों के अनुसार 43,850 तकनीकी शिक्षा प्राप्त (बीई, बीटेक, एमई, एमटेक, बीसीए, एमसीए, पीजीडीसीए, आईटीआई आदि) युवा रोजगार की तलाश में हैं। वहीं 52,938 स्नातक व स्नातकोत्तर शिक्षित युवा भी पंजीकृत बेरोजगार हैं। जिलेवार आंकड़ों में कांकेर सबसे आगे है, जहां 60,415 पंजीकृत बेरोजगार हैं। इसके बाद बस्तर में 51,207 और कोंडागांव में 47,121 बेरोजगार दर्ज हैं। जबकि सबसे कम नारायणपुर में 12,137 बेरोजगार पंजीकृत हैं।

नक्सलवाद के बाद नई चुनौती

कभी बस्तर का सबसे बड़ा संकट नक्सलवाद था, आज सबसे बड़ी ङ्क्षचता रोजगार बनता जा रहा है। सुरक्षा के बाद अब रोजगार सृजन ही विकास की असली कसौटी माना जा रहा है। बस्तर में पर्यटन, वन उत्पाद, खनिज और कृषि आधारित उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन बड़े उद्योग और निजी निवेश अपेक्षित स्तर पर नहीं बढ़ पाए। इसका सीधा असर स्थानीय युवाओं के रोजगार पर पड़ रहा है।

प्रशिक्षण से नहीं चलेगा काम

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की ओर से कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रम तो चलाए जा रहे हैं, लेकिन प्रशिक्षण के बाद स्थायी रोजगार उपलब्ध नहीं होने से उनका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। दूसरी ओर लंबे समय से बेरोजगारी भत्ता भी बंद है, जिससे युवाओं में निराशा बढ़ रही है। यही वजह है कि लाखों युवा डिग्रियां हासिल करने के बाद भी अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं पा रहे हैं।

फैक्ट फाइल

कुल पंजीकृत बेरोजगार
2,17,480
तकनीकी शिक्षित बेरोजगार
43,850
स्नातक/स्नातकोत्तर बेरोजगार
52,938
सबसे अधिक बेरोजगार कांकेर में 60,415
सबसे कम बेरोजगार नारायणपुर में 12,137

एक्सपर्ट व्यू

विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहे बस्तर के लिए अब सबसे बड़ा सवाल बेरोजगारी है। ऐसे में यदि स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, वन उत्पाद और सेवा क्षेत्र में बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर नहीं बढ़ाए गए, तो बेरोजगारी आने वाले वर्षों में और गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौती बन सकती है।

आरपी नेताम
रिटायर्ड रोजगार अधिकारी

Updated on:
17 Jul 2026, 2:49 PM IST
Published on: