
जगदलपुर . आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बच्चों को समय न दे पाने की क्या कीमत चुकानी पड़ती है, इसका दर्द युवराज के पिता व मां से अधिक कौन समझ सकता है। एर्राकोट के बालक छात्रावास के 8वीं में पढऩे वाले युवराज ने शुक्रवार मौत को गले लगा लिया। मौत से पहले युवराज ने अपनी रफ कॉपी में 4 लाइन का एक नोट लिखा है, जिसमें मां-पिता से शिकायत की कि वे उनसे मिलने नहीं आते और न ही घर बुलाते हैं...और तो और हाल चाल भी नहीं पूछते।
पत्रिका टीम शनिवार को तोकापाल के एर्राबोर बालक छात्रावास पहुंची। यहां युवराज के दोस्तों ने बताया कि वह काफी दिनों से उदास रहता था। शुक्रवार को क्लास के बाद लंच में उसने खाना नहीं खाने की बात कही और रूम पर ही रूक गया। इसके बाद वे सभी खाना खाने चले गए । जब वह वापस अपने रूम के लिए पहुुंचे तो रूम अंदर से बंद था। कुछ देर खटखटाने के बाद शिक्षक को इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद किसी तरह रूम खोला गया यहां फंदे में युवराज का लटकता शव मिला। मामले की सूचना परपा पुलिस व परिजनों को दी गई, इधर उसे हॉस्पिटल ले जाया गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने युवराज के रूम मेट्स, आश्रम प्रबंधन समेत गांव वालों से पूछताछ की। शनिवार को शव का पीएम कराकर परिवार वालों को सौंप दिया गया। वहीं मामले की जांच में पुलिस जुट गई है।
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पिता सुकमा में तो मां बालीकोंटा में
परपा टीआई दुर्गेश शर्मा ने बताया कि शुरूआती जांच में पता चला है कि युवराज का पिता राज मिस्त्री का काम करता है, और वह काम करने के लिए सुकमा गया है। वहीं मां भी बालीकोंटा में रहती है। पत्र के अनुसार युवराज से वे समय से मिलने नहीं पहुंच पाते थे। इसी के चलते वह परेशान भी रहता था।
पैसे नहीं, शव को दफनाया
युवराज के चाचा तिलक नागेश व कोटवार देबोरात ने बताया कि पीएम के बाद शव को घर लेकर आए तो अंत्येष्ठि के लिए पैसे तक नहीं थे। गांव वालों ने चंदा किया लेकिन कम होने से शव को दफनाया गया।
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मामले की हो निष्पक्ष जांच
युवराज के गांव वालों ने बताया कि आश्रम प्रबंधन ने उन्हें शनिवार की शाम को घटना की जानकारी दी। इतना ही नहीं युवराज की आश्रम से दूरी मिनटों की है। स्थानीय जनप्रतिनिधि को भी इस बारे में नहीं बताया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
बच्चों पर नजर रखना जरूरी
एमएसडब्लू काउंसलर शोभाराम डहरिया ने बताया कि किशोरावस्था में बच्चे काफी संवेदनशील होते हैं। जरा सी हार व असंतुष्ठि में उनके मन में नकारात्मकता घर कर जाती है और वे गलत कदम उठाने मजबूर हो सकते हैं। एेसे में जरूरी है कि उनका विशेष ध्यान रखा जाए। समय समय पर बच्चों की काउंसिलिंग होनी चाहिए। पारिवारिक सपोर्ट भी सुनिश्चित होनी चाहिए। इसके साथ ही फ्रेंड सर्किल, शिक्षकों का व्यवहार व आसपास का वातावरण सकारात्मक होना चाहिए।
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जांच जारी है
परपा टीआई दुर्गेश शर्मा ने बताया कि शव मिलने के बाद जब मृतक के कॉपी व पुस्तकों की जांच की गई तो उसमें एक नोट मिला है। इसकी जांच की जा रही है। शनिवार को अंत्येष्ठि के चलते परिवार वालों से बात नहीं हो पाई है।