ब्यावर

ब्यावर में अनोखा मामला: रिश्ता टूटा तो लौटाया कन्यादान, थाने में छह बकरियां भी लेकर पहुंचे लड़के वाले

ब्यावर में पति-पत्नी के अलग होने के फैसले के बाद ससुराल पक्ष शादी में कन्यादान के साथ मिली छह बकरियां और घरेलू सामान लेकर महिला थाने पहुंचा। छह साल पुराने इस मामले की चर्चा हो रही है।
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Updated: 28 Oct 2026, 1:08 PM IST
Beawar Woman Police Station
ब्यावर. महिला थाने में रखा कन्यादान का सामान व खेलता मेमना (Photo-Patrika)

ब्यावर . ग्रामीण समाज में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का संबंध होता है। इस रिश्ते में कन्यादान के साथ गाय, भैंस और बकरियां जैसे मवेशी देने की परम्परा भी रही है। समय के साथ भले ही इस परम्परा का चलन कुछ कम हुआ हो, लेकिन देहात में आज भी इसके उदाहरण देखने को मिल जाते है। ब्यावर क्षेत्र के लसाड़िया गांव से जुड़ा एक ऐसा ही मामला बुधवार को सामने आया, जिसमें पति-पत्नी के बीच अलगाव की नौबत आने पर ससुराल पक्ष द्वारा छह साल पहले विवाह में मिली छह बकरियां भी लौटाई गई।

छह साल पहले हुआ था विवाह

महिला थानाधिकारी विद्या मीना ने बताया कि लसाड़िया गांव की एक युवती का विवाह करीब छह साल पहले सोडपुरा गांव के युवक के साथ हुआ था। विवाह के समय कन्यादान के साथ रिश्तेदारों ने छह बकरियां भी दी थीं। ग्रामीण परम्परा में मवेशियों को कन्यादान के साथ देने के पीछे केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं, बल्कि बेटी के नए जीवन और गृहस्थी से जुड़ी भावनाएं भी जुड़ी रहती हैं।

विवाह के बाद समय बीतने के साथ पति-पत्नी के बीच मनमुटाव बढ़ने लगा। आपसी सहमति नहीं बनने पर आखिरकार दोनों ने अलग होने का रास्ता चुन लिया। जब बात अलगाव तक पहुंची तो कन्यादान में दिया गया सामान युवती को लौटाने की प्रक्रिया हुई। इसी दौरान ससुराल पक्ष के लोग छह साल पहले विवाह में मिली छह बकरियां भी लेकर महिला थाने पहुंचे और सामान के साथ उन्हें भी युवती को सौंप दिया। इस दौरान कांस्टेबल सुखपाल, इन्द्रवेश ने परिवाद पर दोनों पक्षों के बीच वार्ता करवाई।

रिश्ते अलग हुए, बेजुबानों से जुड़ी परम्परा निभी

महिला थाने में कन्यादान के सामान के साथ छह बकरियों को लौटाने का दृश्य अपने आप में अलग था। पति-पत्नी के रिश्ते में आई दूरी के बीच बकरियां भी उस विवाह की याद और परम्परा से जुड़ी कड़ी बनकर सामने आईं। इंसानी रिश्तों में मनमुटाव और अलगाव हो सकता है, लेकिन मवेशियों के प्रति ग्रामीण समाज की आत्मीयता और परम्पराओं का महत्व अपनी जगह बना रहता है। गांवों में गाय, भैंस और बकरियां केवल पशुधन नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका और भावनात्मक जुड़ाव का हिस्सा भी होती हैं।

Updated on:
28 Oct 2026, 1:08 PM IST
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