बेमेतरा

कागजों में मृत, असलियत में जिंदा! 95 वर्षीय बुजुर्ग मां को सिस्टम ने बताया ‘दिवंगत’, बंद हुआ पूरे परिवार का राशन

Bemetara News: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में सरकारी लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला को खाद्य विभाग ने रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया, जिससे पूरे परिवार का राशन कार्ड निरस्त हो गया।
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Updated: 4 Aug 2026, 4:48 PM IST
Ration Card Cancelled
सरकार ने 95 वर्षीय बुजुर्ग मां को किया मृत घोषित (photo source- Patrika)

Ration Card Cancelled: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से सरकारी तंत्र की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां एक 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला को विभागीय रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह पूरी तरह जीवित हैं और अपने परिवार के साथ रह रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इस एक गलती का खामियाजा पूरे परिवार को भुगतना पड़ रहा है। महिला का नाम राशन कार्ड से हटाने के साथ ही पूरे परिवार का राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया, जिससे उन्हें सरकारी राशन मिलना बंद हो गया है।

Food Department Chhattisgarh: जीवित महिला को रिकॉर्ड में कर दिया मृत

मामला बेमेतरा जिले की नांदघाट तहसील के ग्राम दोहबा का है। यहां रहने वाली 95 वर्षीय कुन्ती बाई अपने बेटे सुखराम राजपूत और परिवार के साथ रहती हैं। परिवार के अनुसार वह पूरी तरह जीवित हैं, लेकिन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया। बताया जा रहा है कि तकनीकी सत्यापन या विभागीय लापरवाही के चलते यह गलती हुई, जिसके बाद उनके नाम को राशन कार्ड से हटा दिया गया।

एक गलती से पूरे परिवार का राशन बंद

रिकॉर्ड में बुजुर्ग महिला को मृत दर्ज करने के बाद विभाग ने पूरे परिवार का राशन कार्ड भी निरस्त कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि परिवार को उचित मूल्य की दुकान से मिलने वाला खाद्यान्न पूरी तरह बंद हो गया। परिवार को तब इस गलती की जानकारी हुई, जब वे राशन लेने दुकान पहुंचे और उन्हें बताया गया कि उनका राशन कार्ड निरस्त हो चुका है।

बेटे को मां के जिंदा होने का देना पड़ रहा सबूत

सरकारी रिकॉर्ड की इस बड़ी चूक के बाद 95 वर्षीय कुन्ती बाई के बेटे सुखराम राजपूत अब अपनी मां के जीवित होने का प्रमाण लेकर सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने ग्राम पंचायत से जारी जीवित होने का प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के साथ अधिकारियों को आवेदन सौंपा है। उनका कहना है कि जिस मां के साथ वे रोज रहते हैं, उसी को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है।

जिला खाद्य अधिकारी से लगाई गुहार

पीड़ित सुखराम राजपूत ने ओमकार ठाकुर जिला खाद्य अधिकारी को लिखित आवेदन देकर मामले में तत्काल सुधार की मांग की है। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया है कि जांच कर कुन्ती बाई का नाम दोबारा जीवित सदस्यों की सूची में जोड़ा जाए और परिवार का निरस्त राशन कार्ड जल्द से जल्द बहाल किया जाए। परिवार का कहना है कि राशन बंद होने से उन्हें आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

Public Distribution System: सिस्टम की लापरवाही ने खड़े किए सवाल

यह मामला सरकारी रिकॉर्ड के सत्यापन और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर देना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि इससे आम लोगों को होने वाली परेशानियों की भी तस्वीर सामने आती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी गलतियों से बचने के लिए रिकॉर्ड अपडेट करने से पहले जमीनी स्तर पर सही तरीके से सत्यापन होना जरूरी है।

अब जांच और सुधार का इंतजार

फिलहाल परिवार को उम्मीद है कि जिला प्रशासन और खाद्य विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई करेगा। यदि समय रहते रिकॉर्ड में सुधार कर राशन कार्ड बहाल नहीं किया गया, तो 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला और उनका परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह सकता है। यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि आखिर कब तक आम लोगों को अपने ही जीवित होने का सबूत लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे।

Updated on:
4 Aug 2026, 4:48 PM IST
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