
आईओबी में 16 करोड़ की धोखाधड़ी (photo source- Patrika)
IOB bank Scam: इंडियन ओवरसीज बैंक की शाखा से जुड़ी करोड़ों रुपए की वित्तीय धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में सिटी कोतवाली पुलिस को सफलता हाथ लगी है। बैंक में हुए लगभग 14 करोड़ 56 लाख 09 हजार 693 रुपए (कुल 180 खातों में 16.01 करोड़ से अधिक की अनियमितता) के बहुचर्चित गबन कांड के मुख्य आरोपी व तत्कालीन बैंक प्रबंधक विनीत दास को तमिलनाडु के तंजावुर जिले से गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस की विशेष टीम ने आरोपी को 29 जुलाई को हिरासत में लेकर ट्रांजिट रिमांड पर बेमेतरर लाया है, जहां उसे न्यायालय में पेश कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने स्थानीय बिचौलियों के साथ मिलकर बैंक के कड़े नियमों, प्रणालियों और स्थापित प्रक्रियाओं का घोर उल्लंघन करते हुए बड़े वित्तीय हेरफेर को अंजाम दिया था।
मामले की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी, जब इंडियन ओवरसीज बैंक बेमेतरा शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक रज्जू पाटनवार ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर ने प्रस्तुत जांच रिपोर्ट के आधार पर यह खुलासा किया था कि तत्कालीन बैंक प्रबंधक विनीत दास ने पद पर रहते हुए सहयोगियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा। उन्होंने बैंक के नियमों को दरकिनार करते हुए अनधिकृत रूप से विभिन्न खातों में धनराशि अंतरित की और बैंक के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की। शिकायत के आधार पर सिटी कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409, 120बी और 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर गहन विवेचना शुरू की थी।
पुलिस जांच में यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया कि इस अंतरराज्यीय बैंकिंग घोटाले में बैंक अधिकारी के साथ-साथ स्थानीय बिचौलियों के एक गिरोह ने मुख्य भूमिका निभाई थी। प्रकरण में पुलिस ने पूर्व में चार आरोपी बिचौलियों—कमलेश सिन्हा (बेमेतरा), जोहन सिन्हा (केवाछी), टीकाराम माथुर (बिरमपुर) और नागेश वर्मा (केवांछी) को गिरफ्तार कर जेल भेज चुका है। ये सभी आरोपी बैंक में बिचौलिये के रूप में सक्रिय थे। ये ग्रामीणों और फर्जी कागजी कंपनियों के नाम पर लोन फाइलें तैयार करवाते थे और शाखा प्रबंधक के साथ मिलकर स्वीकृत राशि में से बड़ा हिस्सा अवैध रूप से हड़प लेते थे।
बैंक की आंतरिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, 180 खातों में कुल 16.01 करोड़ रुपए की ऋण स्वीकृतियों में गंभीर फर्जीवाड़ा हुआ। कई मामलों में जिन इकाइयों के नाम पर ऋण दिया गया, वे मौके पर मौजूद ही नहीं थीं। फर्जी जीएसटी (नंबरों का उपयोग किया गया, स्व-सहायता समूहों के खातों से अनधिकृत नकदी निकासी की गई और गैर-पैनल अधिवक्ताओं से फर्जी कानूनी राय ली गई। इसके अतिरिक्त, मत्स्य पालन व केसीसी ऋणों में अत्यधिक वित्तपोषण किया गया और विशाल एग्रो जैसे खातों में सरकारी व तीसरे पक्ष की जमीनों को बिना वैध दस्तावेजों के बंधक बनाकर ऋण सीमा स्वीकृत कर दी गई।
इस जटिल और गंभीर बैंकिंग घोटाले को सुलझाने में पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी और योजनाबद्ध रणनीति बेहद कारगर सिद्ध हुई। दुर्ग रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अभिषेक शांडिल्य के सतत पर्यवेक्षण व बेमेतरा पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल के सीधे निर्देशन में पूरी कार्रवाई की गई। इसके साथ ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश कुमार यादव व एसडीओपी बेमेतरा भूषण एक्का के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली निरीक्षक सोनल ग्वाला, सहायक उप-निरीक्षक जितेंद्र कश्यप और आरक्षक पुरुषोत्तम कुंभकार सहित पूरे पुलिस स्टाफ ने एक्शन लिया।
प्रकरण का मुख्य आरोपी विनीत दास (उम्र 40 वर्ष), जो मूलत: अशोक नगर, डोरंडा (रांची, झारखंड) का निवासी है, एफआईआर दर्ज होने के बाद से पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहा था। वर्तमान में वह इंडियन ओवरसीज बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय तंजावुर (तमिलनाडु) में पदस्थ था। बेमेतरा पुलिस को जब आरोपी के तंजावुर में होने की सटीक सूचना मिली, तो विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने तंजावुर पहुंचकर 29 जुलाई को आरोपी विनीत दास को गिरफ्तार किया। इसके बाद स्थानीय न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त कर आरोपी को बेमेतरा लाया गया, जहां पुलिस उससे घोटाले के अन्य पहलुओं पर गहन पूछताछ कर रही है।
Updated on:
01 Aug 2026 09:50 am
Published on:
01 Aug 2026 09:50 am
