
कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Bemetara Murder Case: बेमेतरा जिले के ग्राम संकरा में 17 जुन2024 की रात पैसों के विवाद और पारिवारिक अनबन के कारण पिता की कुल्हाड़ी से वार कर नृशंस हत्या कर शव को स्कूटी पर लादकर नाले में फेंकने वाले आरोपी पुत्र को प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस जघन्य हत्याकांड के मामले में शासन की ओर से लोक अभियोजक शिव गोपाल श्रीवास ने पैरवी की। अदालत ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा का ऐलान किया।
बताना होगा कि प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी पुत्र इंद्रेश साहू (19 वर्ष) को दोषी ठहराया। अदालत ने आरोपी को तत्कालिक भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) के तहत आजीवन कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा, साक्ष्य छिपाने के अपराध में धारा 201 के तहत 3 वर्ष के कठोर कारावास और 1,000 रुपये के जुर्माने की अतिरिक्त सजा दी गई। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ये दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।
यह खौफनाक घटना बेरला थाना क्षेत्र के ग्राम संकरा में 17 जून 2024 की रात घटित हुई थी। मृतक मोतीलाल साहू शराब पीने का आदी था, जिसके कारण घर में अक्सर पैसों और पारिवारिक मुद्दों को लेकर विवाद होता रहता था। वारदात की रात भी पिता के खराब व्यवहार और पैसों की मांग को लेकर कहासुनी हुई। इससे उत्तेजित होकर 19 वर्षीय बेटे इंद्रेश साहू ने कुल्हाड़ी (टांगिया) से पिता के पेट पर वार किया और फिर गला घोंटकर उन्हें बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया।
हत्या के बाद आरोपी इंद्रेश ने साक्ष्य मिटाने के लिए अपने 15 वर्षीय नाबालिग भाई को भी इस अपराध में शामिल कर लिया। दोनों ने मिलकर पिता के शव को प्लास्टिक की बोरी में बांधा, स्कूटी के पायदान पर लादा और सिनवार घाट स्थित पाल कछार नाले में फेंक दिया। इसके अलावा, हत्या में इस्तेमाल टांगिया को घर के पीछे बने कुएं में फेंक दिया वहीं पिता के दो मोबाइल फोनों को भी गांव के बड़े तालाब में फेंक दिया। 20 जून 2024 को शव बरामद होने पर आरोपी ने शुरुआत में पुलिस को गुमराह करने का प्रयास भी किया।
पुलिस जांच के दौरान संकरा-सिनवार मार्ग के सीसीटीवी फुटेज में 18 जून की सुबह दोनों भाई स्कूटी पर पीली बोरी ले जाते और बाद में खाली हाथ लौटते दिखे। सीडीआर और मोबाइल टावर लोकेशन से भी उनकी मौजूदगी साबित हुई। कड़ाई से पूछताछ पर आरोपी ने जुर्म कबूल किया, जिसके बाद कुएं से खून से सना टांगिया और तालाब से मोबाइल बरामद किए गए। अदालत ने इन अकाट्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी को सजा सुनाई, जबकि मामले में शामिल 15 वर्षीय नाबालिग भाई का केस कानून के अनुसार किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) के समक्ष अलग से विचाराधीन है।
Updated on:
31 Jul 2026 01:23 pm
Published on:
31 Jul 2026 01:23 pm
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