मणिपुर के ट्रोंग्लाओबी क्षेत्र में BSF जवान के घर में सो रहे 2 बच्चों की निर्मम हत्या के बाद प्रदर्शन भड़का। सुरक्षा बलों की गोलीबारी में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई।
Manipur Violence: मणिपुर पिछले कई सालों से जातीय तनाव की आग में झुलस रहा है। मई 2023 को शुरू हुई हिंसा के बाद से राज्य में कई बार हालात बिगड़े हैं। इसी बीच, बिष्णुपुर जिले के ट्रोंग्लाओबी क्षेत्र में हुई ताजा घटना ने स्थिति को फिर से गंभीर बना दिया है, जहां एक BSF जवान के घर में सो रहे दो छोटे बच्चों की हत्या कर दी गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया और प्रदर्शन भड़क उठा। रिपोर्ट्स के अनुसार, गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों की चौकी की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात काबू में लाने के लिए सुरक्षा बलों को गोलीबारी करनी पड़ी, जिसमें 2 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई।
ट्रोंग्लाओबी, जो चुराचांदपुर जिले की सीमा के पास स्थित है, पहले भी कई बार हिंसक घटनाओं का गवाह रहा है। लेकिन फरवरी में नई सरकार के गठन के बाद यह पहली बड़ी घटना है। इस घटना ने यह संकेत दिया है कि जमीन पर हालात अभी भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं हैं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद हिंसा की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं, जिससे आम लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह घटना दिल तोड़ने वाली है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 3 साल बाद भी मणिपुर में हिंसा खत्म नहीं हुई और मासूम बच्चे इसकी कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को लेकर संवेदनहीन हो गई है और शांति स्थापित करने में विफल रही है।
मणिपुर में शांति बहाली के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए गए हैं, लेकिन ताजा घटना ने इन प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नई सरकार के गठन के बाद उम्मीद थी कि हालात सुधरेंगे, लेकिन इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि जमीनी स्तर पर समस्याएं अभी भी गहरी हैं। जब तक समुदायों के बीच विश्वास बहाल नहीं होता, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है।