
भरतपुर . तीन साल से जिस पिता की तलाश में बेटा जगह-जगह भटक रहा था, जिनकी राह देखते-देखते परिवार की आंखें थक गई थीं, वह आखिरकार सामने आ गए। पिता को बेटियों ने जासे ही रोका, वे खुद को रोक नहीं सकीं और उनसे लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। बेटे ने भी पिता को गले लगा लिया। अपना घर आश्रम भरतपुर में हुआ यह मिलन महज एक परिवार की मुलाकात नहीं, बल्कि तीन साल के इंतजार, उम्मीद और दर्द के खत्म होने का भावुक क्षण था।
यह दृश्य देख वहां मौजूद सेवासाथियों और अन्य लोगों की आंखें भी नम हो गईं। रामबाबू प्रभुजी करीब तीन साल पहले अलीगढ़ से उपचार के लिए अस्पताल गए थे। इसके बाद वह घर नहीं लौटे। परिवार ने उन्हें हरसंभव जगह तलाशा। पुलिस थाने में गुमशुदगी भी दर्ज कराई गई, लेकिन लंबे समय तक कोई सुराग नहीं मिला। बेटे राजू ने भी पिता की तलाश में कई जगहों पर चक्कर लगाए, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। इसके बावजूद परिवार को उम्मीद थी कि पिता किसी दिन जरूर मिलेंगे।
15 जून 2023 को रामबाबू प्रभुजी अटलबंद भरतपुर से रेस्क्यू किए गए। इसके बाद उन्हें अपना घर आश्रम में सेवा, उपचार और पुनर्वास के लिए भर्ती कराया गया। आश्रम में लगातार देखभाल और उपचार के दौरान स्वास्थ्य में सुधार हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने अपने गांव और परिवार से जुड़ी जानकारी देना शुरू किया। प्रभुजी से मिली जानकारी के आधार पर आश्रम की पुनर्वास टीम ने अलीगढ़ के गांव जलालपुर में संपर्क किया। गांव के सरपंच के माध्यम से परिवार तक सूचना पहुंची।
जानकारी की पुष्टि होने के बाद पुत्र राजू, उसकी पत्नी रिकेश और बेटियां सुशील व शीतल अपने बच्चों के साथ भरतपुर पहुंचे। परिवार को जैसे ही रामबाबू प्रभुजी के सामने लाया गया तो कुछ पल के लिए सभी भावुक हो उठे। पिता को देखते ही बेटियां उनसे लिपटकर रो पड़ीं। बेटे राजू ने भी पिता को गले लगा लिया। वर्षों से जिस मिलन का परिवार इंतजार कर रहा था, वह पल सामने था। आश्रम में मौजूद लोगों ने भी इस दृश्य को देखा तो उनकी आंखें नम हो गईं।