अपना घर आश्रम में एक परिवार के लिए जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी लेकर आया। करीब 16 वर्षों से बिछड़ी मां का अपने बेटों से मिलन हुआ तो आश्रम परिसर भावनाओं से भर उठा। मां और बेटे जैसे ही आमने-सामने आए, एक-दूसरे से लिपटकर फफक पड़े।
भरतपुर। अपना घर आश्रम में एक परिवार के लिए जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी लेकर आया। करीब 16 वर्षों से बिछड़ी मां का अपने बेटों से मिलन हुआ तो आश्रम परिसर भावनाओं से भर उठा। मां और बेटे जैसे ही आमने-सामने आए, एक-दूसरे से लिपटकर फफक पड़े। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। ईद से ठीक पहले हुए इस मिलन को परिवार ने ‘खुदा की सबसे बड़ी ईदी’ बताया।
असम के मरीगांव जिले की रहने वाली रोसिया उर्फ आईशा खातून मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण करीब 16 वर्ष पहले अचानक घर से निकल गई थीं। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने से वह घर का रास्ता भूल गईं और परिवार से बिछड़ गईं। वर्षों तक उनका कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद 8 अगस्त 2015 को हरिओम सेवा दल रोहतक की ओर से उन्हें सेवा और उपचार के लिए मां माधुरी बृज वारिस सेवा सदन अपना घर आश्रम भरतपुर में भर्ती कराया गया।
आश्रम में लगातार सेवा, देखभाल और उपचार के बाद उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने अपना नाम और पता बताया। इसके बाद आश्रम की पुनर्वास टीम के सहयोगी सुभाष शर्मा ने असम के मरीगांव जिले के पलाहजूरी गांव में संपर्क किया और परिवार को सूचना दी कि उनकी मां जीवित और सुरक्षित हैं। सोमवार को उनके बेटे नूरूल हुडा और नूर साहेद आलम आश्रम पहुंचे। मां को सामने देखकर दोनों बेटों की आंखों से आंसू बह निकले। उन्होंने बताया कि जब मां घर से गई थीं, तब वे दोनों बहुत छोटे थे और उनकी बहनें उनसे भी छोटी थीं।
पिता ने पत्नी की तलाश में वर्षों तक दर-दर भटककर खोजबीन की। रोज काम खत्म करने के बाद मां को ढूंढने निकल जाते थे। उन्हें भरोसा था कि एक दिन पत्नी जरूर मिलेगी, लेकिन लगभग 10 वर्षों तक लगातार तलाश और इंतजार करने के बाद लॉकडाउन के दौरान मां के गम में ही उनका निधन हो गया।
बेटों ने भावुक होकर कहा, ‘पिता की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन खुदा ने ईद से पहले मां से मिलाकर जिंदगी की सबसे बड़ी कमी दूर कर दी। अब समझ आया कि मां का होना कितना जरूरी है।’ परिवार की बड़ी बेटी ने भी नम आंखों से कहा कि आज घर, परिवार और खुशियां सब हैं, लेकिन पिता नहीं हैं। उनकी सबसे बड़ी इच्छा थी कि एक बार अम्मी मिल जाएं। विदाई के समय आश्रम में बेहद भावुक माहौल रहा।
रोसिया की आंखों में परिवार से मिलने की खुशी थी तो आश्रम परिवार से बिछडऩे का दर्द भी दिख रहा था। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आश्रम ने रोसिया उर्फ आईशा खातून को उनके बेटों के सुपुर्द कर असम रवाना किया।