16 मई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan Summer Vacation : राजस्थान के शिक्षा विभाग का आदेश, शिक्षकों-कार्मिकों को लगा झटका, शिक्षक संगठन नाराज

Rajasthan Summer Vacation : शिक्षा विभाग का नया आदेश आया। शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार शिक्षक और अन्य कार्मिक ग्रीष्मावकाश के दौरान बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।

2 min read
Google source verification
Rajasthan Summer Vacation Education Department new Order Teachers and staff were shocked

भरतपुर ग्रीष्मावकाश। फोटो - AI

Rajasthan Summer Vacation : गर्मी की छुट्टियां शुरू होने से पहले ही शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच घूमने-फिरने, रिश्तेदारों के यहां जाने और पारिवारिक कार्यक्रमों की तैयारियां शुरू हो जाती है। खासकर महिला शिक्षक पीहर या ससुराल जाने, बच्चों के साथ छुट्टियां बिताने और पहले से बुकिंग कराने की योजना बनाती है, लेकिन इस बार ग्रीष्मावकाश से पहले शिक्षा विभाग के एक आदेश ने शिक्षकों की सारी प्लानिंग पर ब्रेक लगा दिया है।

शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक अब शिक्षक और शिक्षा विभाग के अन्य कार्मिक ग्रीष्मावकाश के दौरान बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। शिक्षा विभाग ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को मुख्यालय पर उपस्थित रहने और मोबाइल फोन चालू रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल ड्यूटी पर बुलाया जा सके।

दरअसल, राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित प्राध्यापक, प्राध्यापक कृषि एवं कोच प्रतियोगी परीक्षा-2025 का आयोजन 31 मई से 5 जून तक होना है। यह परीक्षा माध्यमिक शिक्षा विभाग के जरिए कराई जाएगी। परीक्षा संचालन में बड़ी संख्या में शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगनी है। इसी को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर अधीनस्थ कार्मिकों को पाबंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

आदेशों का तामील होना चाहिए

विभागीय पत्र में स्पष्ट कहा है कि ग्रीष्मावकाश घोषित होने के बावजूद सभी अधिकारी-कर्मचारी अपने मुख्यालय पर उपलब्ध रहे, मोबाइल चालू रखें और आदेश मिलते ही ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए तैयार रहे। इससे संबंधित आदेशों की तामील और परीक्षा संचालन प्रभावित नहीं होना चाहिए।

नाराजगी और असमंजस की स्थिति

आदेश सामने आने के बाद शिक्षकों में नाराजगी और असमंजस दोनों का माहौल है। कई शिक्षकों का कहना है कि छुट्टियों से पहले ही परिवार के साथ यात्रा की योजना बनाई जा चुकी थी, टिकट बुक है और सामाजिक कार्यक्रम तय हैं। ऐसे में अचानक मुख्यालय नहीं छोड़ने के निर्देश ने मुश्किल खड़ी कर दी है।

शिक्षकों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ग्रीष्मावकाश घोषित है तो क्या छुट्टियों में भी वे वास्तव में 'ऑन ड्यूटी' माने जाएंगे। विभाग के इस आदेश ने ग्रीष्मावकाश को लेकर नई बहस छेड़ दी है। शिक्षकों का कहना है कि छुट्टी घोषित होने के बावजूद यदि हर समय उपलब्ध रहना है तो फिर अवकाश का वास्तविक अर्थ ही क्या रह गया।

ग्रीष्मावकाश शिक्षकों का वैधानिक अवकाश

ग्रीष्मावकाश शिक्षकों का वैधानिक अवकाश है, जिसमें वे पूरे साल की शैक्षणिक व्यस्तताओं और परीक्षा कार्यों के बाद अपने परिवार के साथ समय बिताने की योजना बनाते हैं। विभाग की ओर से छुट्टियां घोषित करने के बाद मुख्यालय नहीं छोडने जैसे आदेश जारी करना शिक्षकों के अधिकारों और निजी जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप है।

यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा के लिए ड्यूटी लगानी है तो संबंधित कार्मिकों को पूर्व सूचना देकर सीमित अवधि के लिए बुलाया जा सकता है, लेकिन पूरे ग्रीष्मावकाश में सभी शिक्षकों को मुख्यालय से बांधकर रखना तर्कसंगत नहीं है।
पवन शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम