
भरतपुर . ग्राम पंचायत मुख्यालय को लेकर घसौला के ग्रामीणों का विरोध अब चुनाव बहिष्कार तक पहुंच गया है। राजस्व ग्राम घसौला के ग्रामीणों ने पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों के बहिष्कार का ऐलान करते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में घसौला के नाम से ग्राम पंचायत बनाई गई थी, लेकिन बाद में मुख्यालय हटाकर नगला बरताई को पंचायत मुख्यालय बना दिया गया, जब तक घसौला को पंचायत मुख्यालय नहीं बनाया जाएगा, तब तक क्षेत्र के सभी राजस्व ग्राम चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि नगला बरताई को पंचायत मुख्यालय बनाने के लिए राजनीतिक दबाव में प्रक्रिया बदली गई। उनका कहना है कि पूर्व में घसौला राजस्व ग्राम में घसौला, नगला खेहरी, नगला पिचुमरिया, नगला सुजान पारुआ और नगला धनसौंरा शामिल थे। बाद में नगला खेहरी और नगला पिचुमरिया को अलग राजस्व ग्राम घोषित कर दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इससे घसौला की वर्ष 2011 की जनसंख्या कम हो गई। ग्रामीणों के अनुसार प्रथम अधिसूचना में घसौला को ग्राम पंचायत बनाया गया था, लेकिन बाद में नगला बरताई को पंचायत मुख्यालय घोषित कर दिया गया। इसके विरोध में कई बार आपत्तियां भी दर्ज कराई गईं। ग्रामीणों का दावा है कि उनकी आपत्तियों का जवाब उनके पक्ष में आने के बावजूद घसौला को पंचायत मुख्यालय नहीं बनाया गया।
ग्रामीणों ने मामले को लेकर अपनी नाराजगी जताते हुए पंचायतों के गठन और गांवों को जोड़ने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। ग्रामीणों के अनुसार, घसौला और नगला बरताई के बीच करीब आठ किलोमीटर की दूरी है। इसके बावजूद नगला खेहरी गांव घसौला से महज 400 मीटर की दूरी पर होने के बाद भी उसे बहनेरा में शामिल कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि दूरी और आपसी जुड़ाव को देखते हुए नगला खेहरी को घसौला से अलग करना उचित नहीं है।
ग्रामीणों ने बताया कि नगला खेहरी पहले घसौला राजस्व ग्राम का अभिन्न हिस्सा रहा है। ऐसे में अब पंचायतों के पुनर्गठन के दौरान इसे दूसरे क्षेत्र में जोड़ने को लेकर ग्रामीणों में असंतोष है। उनका कहना है कि गांवों को पंचायतों से जोड़ते समय सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि गांवों की भौगोलिक स्थिति, आपसी दूरी और लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने नई पंचायतों के गठन में जनसंख्या के मानकों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सुनाई ग्राम पंचायत की आबादी 2494 है, इसके बावजूद वहां नई पंचायत का गठन किया गया। वहीं दूसरी ओर घसौला की आबादी 2480 होने के बावजूद उसे पंचायत मुख्यालय का दर्जा नहीं दिया गया।