भरतपुर

भरतपुर: जिस आंगन में साथ पले, उसी घर के लिए सगे भाई पर FIR, खून के रिश्ते में पड़ी दरार

भरतपुर के बयाना में पैतृक संपत्ति विवाद ने सगे भाइयों के रिश्ते में दरार डाल दी। ओमप्रकाश ने बड़े भाई समेत कई लोगों पर कथित साजिश रचकर नक्शा, पट्टा और दस्तावेजों के जरिए पैतृक मकान हड़पने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।
2 min read
Jul 16, 2026
Bharatpur News
घर के लिए सगे भाई पर FIR (फोटो-एआई)

बयाना (भरतपुर): जिस घर की दीवारें कभी माता-पिता के प्यार और बचपन की यादों से जुड़ी थीं। वही, आशियाना अब खून के रिश्तों में अविश्वास और कथित साजिश की जगह बन गया है। बयाना कोतवाली थाना क्षेत्र में दर्ज एक हालिया एफआईआर ने एक बार फिर समाज के सामने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि जब अपनों पर ही भरोसा न रहे, तो परिवार की नींव कितनी सुरक्षित रह सकती है।

कोतवाली पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, बयाना के पठानपाड़ा निवासी ओमप्रकाश ने अपने सगे बड़े भाई योगेंद्र सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ पैतृक संपत्ति को कथित रूप से हड़पने और धोखाधड़ी करने की एक सोची-समझी साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है।

अधिकार छुपाकर स्वयं को दर्शाया एकमात्र स्वामी

शिकायतकर्ता ओमप्रकाश का कहना है कि माता-पिता की मृत्यु के बाद करीब 240 वर्ग गज में फैले उनके पैतृक मकान पर सभी भाई-बहनों का बराबर और वैधानिक अधिकार था। सभी सदस्य एक साथ उसी मकान में रहते भी थे। इसके बावजूद, कथित तौर पर वर्ष 2023 में एक सुनियोजित योजना के तहत घर का एक नया नक्शा तैयार करवाया गया। आरोप है कि इस नक्शे में अन्य सभी कानूनी वारिसों के अधिकारों और अस्तित्व को पूरी तरह से छिपा दिया गया और बड़े भाई ने स्वयं को उस संपत्ति का एकमात्र स्वामी दर्शा दिया।

कथित मिलीभगत से पट्टा जारी कराकर बेची संपत्ति

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि इसी फर्जीवाड़े और गलत तथ्यों के आधार पर तत्कालीन नगर पालिका प्रशासन को गुमराह कर मकान का पट्टा अपने नाम जारी करवा लिया गया। साजिश यहीं नहीं रुकी; कानूनी अड़चनों से बचने और मालिकाना हक को उलझाने के लिए संपत्ति को क्रमशः पहले अपनी पत्नी, फिर एक अन्य महिला और अंततः एक तीसरे व्यक्ति के नाम बेच दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम बेहद शातिर और सुनियोजित तरीके से इसलिए अंजाम दिया गया, ताकि वास्तविक वारिसों को उनके पैतृक हक से हमेशा के लिए वंचित किया जा सके।

बैंक दस्तावेज से खुला राज, पार्षद भी नामजद

इस पूरे मामले में तत्कालीन नगर पालिका पार्षद सहित कुछ अन्य लोगों पर भी कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने और इस अवैध प्रक्रिया में सहयोग करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ओमप्रकाश के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब उन्हें एक सरकारी क्षेत्र के बैंक से जुड़े किसी दस्तावेज की जानकारी मिली। इसके बाद जब उन्होंने कड़ियां जोड़ीं, तो धोखाधड़ी की परतें एक-एक कर सामने आती गईं। फिलहाल, कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेकिन इस घटना ने भाई-भाई के रिश्ते के बीच आई इस कड़वाहट को लेकर इलाके में चर्चाएं तेज कर दी हैं।

Updated on:
16 Jul 2026 04:55 pm
Published on:
16 Jul 2026 04:55 pm