
भरतपुर: घर में बेटी के जन्म से खुशियां आई थीं। परिवार ने नन्ही परी के आने पर कई सपने संजोए थे। उम्मीद थी कि उसकी किलकारियों से घर-आंगन गूंजेगा और परिवार की खुशियां दोगुनी हो जाएंगी। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि ये खुशियां इतनी जल्दी मातम में बदल जाएंगी। जन्म के अगले ही दिन नवजात बच्ची की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
बता दें कि भरतपुर शहर के जनाना अस्पताल में शनिवार को बच्ची की मौत के बाद परिजनों का दर्द आक्रोश में बदल गया। उन्होंने चिकित्सकों और नर्सिंग स्टॉफ पर समय पर उपचार नहीं देने का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया। सूचना पर पहुंची मथुरा गेट थाना पुलिस ने परिजनों को समझाकर मामला शांत कराया।
जानकारी के अनुसार, भरतपुर के सुभाष नगर निवासी लक्ष्मीकांत के छोटे भाई देवकीनंदन की पत्नी रिंकी को 8 अक्टूबर को प्रसव के लिए जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को सिजेरियन ऑपरेशन से बच्ची का जन्म हुआ। बेटी के जन्म के साथ ही परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन अगले ही दिन बच्ची की तबीयत बिगड़ने से परिजनों की चिंता बढ़ गई।
परिजनों के अनुसार, शुक्रवार शाम को बच्ची को बुखार आया। इसके बाद वे उसे लेकर नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) पहुंचे। परिवार का आरोप है कि वहां चिकित्सक ने बच्ची को देखने के बाद केवल सिरप लिखकर दे दिया।
परिजनों का कहना है कि शनिवार सुबह करीब छह बजे बच्ची की तबीयत फिर बिगड़ने लगी। वह कराहने लगी तो परिवार के लोग घबरा गए। इसके बाद सुबह करीब 10 बजे वे बच्ची को लेकर दोबारा एनआईसीयू पहुंचे।
परिवार का आरोप है कि वहां मौजूद स्टाफ ने चिकित्सक के अंदर नहीं होने की बात कही और बच्ची को ओपीडी ले जाने के लिए कहा। इसके बाद परिजन बच्ची को लेकर महिला चिकित्सक के पास पहुंचे। जांच के बाद चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जिस बेटी को परिवार ने एक दिन पहले गोद में लेकर भविष्य के सपने संजोए थे, उसकी मौत की खबर ने सभी को तोड़ दिया। अस्पताल परिसर में परिजनों का दुख आक्रोश में बदल गया और उन्होंने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
नवजात के ताऊ लक्ष्मीकांत ने बच्ची की मौत के लिए इलाज में लापरवाही को जिम्मेदार बताते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिजनों का कहना है कि यदि बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर समय रहते उचित उपचार मिलता, तो शायद उसे बचाया जा सकता था। हालांकि, उपचार में लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बच्ची की मौत के वास्तविक कारण को लेकर चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शेखर शर्मा के अनुसार, बच्ची का जन्म सिजेरियन ऑपरेशन से हुआ था और वह मां के पास ही थी। बुखार की शिकायत मिलने पर उसे दवा दी गई थी। बाद में तबीयत बिगड़ने पर बच्ची को संभालने और सीपीआर देने का प्रयास किया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। चिकित्सक ने दूध के सांस की नली में चले जाने को भी नवजात की मौत की संभावित वजह बताया। ऐसे में परिजनों के आरोपों और चिकित्सक के बयान के बीच बच्ची की मौत के कारणों को स्पष्ट करना अहम है।
एक परिवार के लिए बेटी का जन्म नई उम्मीदों और सपनों की शुरुआत था, लेकिन अगले ही दिन उसकी मौत ने सब कुछ बदल दिया। परिवार अब बच्ची की मौत के लिए जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की मांग कर रहा है। घटना ने अस्पताल में नवजात के उपचार और आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।