राजस्थान में उम्रकैद की सजा काट रहे बंदी मोहित की अस्पताल में मौत हो गई। 18 फरवरी को कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 21 फरवरी को तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
Vijaypal Singh Murder: भरतपुर जिले में सेवर स्थित केंद्रीय कारागृह में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी की आरबीएम अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। बंदी को 21 फरवरी को तबीयत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कोर्ट ने बंदी को 18 फरवरी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
सेवर सेंट्रल जेल के जेलर रणवीर सिंह ने बताया कि मृतक बंदी मोहित उर्फ मोनू (30) निवासी पंजाबी मोहल्ला नदबई था। 21 फरवरी को अचानक बंदी की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। जेल प्रशासन के अनुसार, सजा सुनाए जाने के बाद से उसकी मानसिक स्थिति भी सामान्य नहीं थी और वह असामान्य व्यवहार कर रहा था।
मृतक मोहित वर्ष 2020 में हुए बहुचर्चित विजयपाल सिंह हत्याकांड में दोषी था। यह घटना 12 जनवरी 2020 की है, जब नदबई कस्बे की एक मिठाई की दुकान पर विजयपाल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
परिजनों की रिपोर्ट पर नदबई थाने में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने करीब छह महीने बाद इस प्रकरण में योगेंद्र सिंह, मोहित उर्फ मोनू और हिमांशु को गिरफ्तार किया था। प्रकरण की सुनवाई के बाद न्यायालय ने 18 फरवरी को योगेंद्र सिंह और मोहित उर्फ मोनू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि एक आरोपी हिमांशु को फरार घोषित किया था।
सजा सुनाए जाने के बाद से ही मोहित की तबीयत बिगड़ने लगी थी, जिसके चलते उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। मोहित के परिजनों ने बताया कि वह नदबई कस्बे के एक होटल में बर्तन साफ करने का काम करता था और सजा से पहले उसकी हालत सामान्य थी। सजा के बाद से ही उसकी मानसिक स्थिति प्रभावित हुई थी।
नदबई कस्बे के बहुचर्चित विजयपाल सिंह हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीताराम मीना की अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही प्रत्येक पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया था और जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन महीने के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया गया था।
अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि अपराध की प्रकृति गंभीर है और समाज में कानून के प्रति विश्वास बनाए रखने के लिए कठोर दंड आवश्यक है। फैसले के दौरान न्यायालय परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
गौरतलब है कि 12 जनवरी 2020 की शाम विजयपाल सिंह कस्बे की एक मिठाई की दुकान पर मौजूद थे, तभी आरोपियों ने वहां पहुंचकर उन्हें गोली मार दी थी। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।