College PTI Recruitment : राजस्थान में करीब साढ़े तीन दशक बाद निकली कॉलेज पीटीआई भर्ती अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। अभ्यर्थियों को छूट नहीं दी गई तो राजस्थान के अभ्यर्थी बाहर हो जाएंगे और पद दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों से भरने की संभावना बढ़ जाएगी। पढ़ें यह न्यूज।
College PTI Recruitment : राजस्थान में करीब साढ़े तीन दशक बाद निकली कॉलेज पीटीआई भर्ती अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। भर्ती प्रक्रिया में राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके खिलाड़ियों के साथ ही खेल किया जा रहा है, जिन फेडरेशनों की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के बलबूते भारतीय टीमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलती हैं, उन्हीं प्रतियोगिताओं में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों के स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट को मान्य नहीं किया जा रहा है।
वर्ष 2023 में राजस्थान लोक सेवा आयोग के माध्यम से करीब 35 साल बाद कॉलेज पीटीआई भर्ती निकाली गई थी। लिखित परीक्षा और परिणाम जारी होने के बाद अब साक्षात्कार प्रक्रिया शेष है। इसी बीच आरपीएससी की ओर से जारी एक सूची में फेडरेशन से राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेले खिलाड़ियों के प्रमाण पत्रों को मान्य नहीं माना गया है। इसके चलते ऐसे कई अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित कर दिया गया जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का है, प्रतिनिधित्व किया है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यह स्थिति हैरान करने वाली है, क्योंकि इन्ही फेडरेशनों की प्रतियोगिताओं से चयनित खिलाड़ी आगे चलकर भारतीय टीम का हिस्सा बनते हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके बावजूद उन्हीं प्रतियोगिताओं के प्रमाण पत्रों को अस्वीकार करना राष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ अन्याय है।
खास बात यह है कि राज्य सरकार अन्य भर्तियों में फेडरेशन से खेले राष्ट्रीय खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न 2 प्रतिशत कोटे का लाभ देती है। ऐसे में कॉलेज पीटीआई भर्ती में उन्हीं प्रमाण पत्रों को मान्यता नहीं देना विरोधाभासी माना जा रहा है।
शारीरिक शिक्षकों का कहना है कि कॉलेज पीटीआई के लिए एमपीएड के साथ नेट, सेट या पीएचडी जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य है। इसके बावजूद योग्य खिलाड़ियों को केवल प्रमाण पत्र के आधार पर बाहर करना उचित नहीं है।
उनका कहना है कि यदि आयोग को प्रमाण पत्रों पर संदेह है तो उनकी में जांच कराई जाए या खिलाड़ियों का फिजिकल ट्रायल लिया जाए और उसके बाद ही उन्हें साक्षात्कार में शामिल किया जाए।
पूर्व खिलाड़ियों का कहना है कि यदि इस निर्णय में सुधार नहीं हुआ तो यह न केवल खिलाड़ियों का अपमान होगा, बल्कि इससे भविष्य में युवा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के प्रति भी हतोत्साहित होंगे।
आयु सीमा को लेकर भी अभ्यर्थियों में नाराजगी है। यह भर्ती लगभग 35 वर्ष बाद निकली है। इससे पहले वर्ष 1992 में कॉलेज पीटीआई की भर्ती केवल इंटरव्यू के माध्यम से की गई थी। अंतराल के बाद भर्ती निकलने के बावजूद आयु सीमा में कोई विशेष राहत नहीं दी गई।
दूसरी और कॉलेज शिक्षा विभाग में ही असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में सरकारी शिक्षकों को 3 अवसर तक 15 वर्ष की आयु सीमा में छूट दी जाती है। दोनों पदों की शैक्षणिक योग्यता भी लगभग समान है।
इसके बाद भी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में जहां आयु सीमा में छूट दी गई है। वहीं कॉलेज पीटीआई भर्ती में सरकारी शारीरिक शिक्षकों को यह राहत नहीं मिली। अभ्यर्थियों को छूट नहीं दी गई तो लंबे समय से इंतजार कर रहे राजस्थान के कई अभ्यर्थी बाहर हो जाएंगे और पद दूसरे राज्यों के उम्मीदवारों से भरने की संभावना बढ़ जाएगी।
कॉलेज पीटीआई भर्ती में फेडरेशन से खेले राष्ट्रीय खिलाड़ियों के स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट को अमान्य करना पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ अन्याय है, जिन फेडरेशनों की प्रतियोगिताओं से खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्हीं के प्रमाण पत्रों को नकारना समझ से परे है।
ऐसे फैसलों से उनका मनोबल तोड़ा जा रहा है। यदि प्रमाण पत्रों पर संदेह है तो उनकी जांच कराई जाए या खिलाड़ियों का फिजिकल ट्रायल लिया जाए। लंबे समय बाद भी भतीं प्रक्रिया में उम्र सीमा में छूट नहीं देना सरासर अन्याय है।
तेजवीर सिंह बाबा, पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी