
फाइल फोटो पत्रिका
Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी मामले में राहत के लिए दो विकल्प निर्धारित हों तो उनमें से किसी एक का ही लाभ लिया जा सकता है। किसी भी व्यक्ति को दो नावों में सवारी करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड ने चरण सिंह खंगारोत की पुनरीक्षण याचिका को निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी आदेश या निर्णय के खिलाफ एक ही समय में दो समानांतर कानूनी उपाय अपनाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है, जो स्वीकार्य नहीं है। भले तकनीकी रूप से कई उपाय उपलब्ध हों, लेकिन एक ही कारण के लिए उन्हें एक साथ अपनाना स्वीकार्य नहीं है।
कोर्ट ने कहा जब पहले अपील दायर की जा चुकी और उस पर राहत नहीं मिलती, तो बीच में दूसरा विकल्प अपनाकर दो नावों पर सवार होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
याचिकाकर्ता के खिलाफ सेल डीड के आधार पर वसूली के लिए वाद दायर किया, जिसमें फैसला वादी के पक्ष में हो गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने उसी डिक्री के खिलाफ दीवानी प्रक्रिया शुरू कर दी, जिस पर राहत नहीं मिली तो उसने हाइकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर कर दी।
Updated on:
9 Mar 2026, 7:02 AM IST
Published on:
9 Mar 2026, 7:02 AM IST
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