LPG Crisis : डीग. भीषण गर्मी के बीच अब आदमी की जेब महंगाई से झुलसने लगी है। बढ़ती महंगाई में कमर्शियल गैस की किल्लत का असर अब सीधा स्वाद पर पड़ने लगा है। हलवाई, ढाबा संचालक और रेस्टोरेंट मालिकों ने मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों के दामों में बढ़ोत्तरी कर दी है।
LPG Crisis : डीग. भीषण गर्मी के बीच अब आदमी की जेब महंगाई से झुलसने लगी है। बढ़ती महंगाई में कमर्शियल गैस की किल्लत का असर अब सीधा स्वाद पर पड़ने लगा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ गई है। हलवाई, ढाबा संचालक और रेस्टोरेंट मालिकों ने मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों के दामों में बढ़ोत्तरी कर दी है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की बढ़ी कीमतों का असर अब नाश्ते पर साफ दिख रहा है। गैस की कमी और महंगे तेल-दाल के कारण समोसा, कचौरी, पोहा और चाय के दाम बढ़ गए है।
दुकानदारों ने साइज और क्वांटिटी भी घटा-बढ़ा दी है। पहले जहां 15 रुपए में एक कचौरी या समोसा मिल जाता था, अब 20 रुपए में मिल रहा है। चाय के 15 से 20 रुपए तक देने पड़ रहे हैं। अन्य फास्ट फूड में भी दाम बढ़ा दिए गए है, जिससे ग्राहक और दुकानदार दोनों परेशान है।
गैस संकट का सबसे बड़ा असर फास्ट फूड कारोबार पर पड़ा है। सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के बाद दुकानदारों ने समोसा, कचौरी, चाउमीन, पकौड़ी और अन्य तली हुई चीजें बनाने वाले दुकानदारों ने कीमतों में करीब 25 फीसदी तक बढ़ोत्तरी की है। ताकि बढ़ते खर्च की भरपाई की जा सके।
कचौरी-समोसे की रेट में 5 रुपए वृद्धि कर कीमत 20 रुपए प्रति कर दी गई है। वहीं गैस की कमी के कारण कुछ दुकानों पर केवल सीमित आइटम ही बनाए जा रहे हैं। कुछ दुकानदारों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में उन्हें कीमतों में और बढ़ोत्तरी करनी पड़ सकती है।
गैस संकट के कारण लकड़ी और कोयले की मांग तेजी से बढ़ गई है। लकड़ी बेचने वाले व्यापारियों का कहना है कि गैस की किल्लत और कमर्शियल गैस सिलेंडर की बढ़ी कीमतों के बाद से लकड़ी की मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है।
थोक में लकड़ी खरीदने वाले हलवाइयों, दुकानदारों का कहना है कि जहां पहले 700-750 रुपए प्रति क्विटल लकड़ी के भाव थे, वो आज 1100 रुपए प्रति क्विटल तक पहुंच गए हैं। लकड़ी की कीमतों में 400 रुपए प्रति क्विटल बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। अचानक मांग बढ़ने से बमुश्किल हो रही आपूर्ति में कई जगहों पर लकड़ी और कोयले की उपलब्धता भी सीमित हो गई है।
इन दिनों लगातार बढ़ रही महंगाई से जीना दूभर हो रहा है। विशेष रूप से गरीब, मध्यम वर्ग के लिए कई तरह की परेशानियां खड़ी हो गई है। लकड़ियों के दाम बढने से विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के जंगलों में हरे-भरे पेड़ों को काटकर उन्हें लकड़ी के रूप में उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाजार में लकड़ियों के दाम काफी बढ़ गए है।