Success Story : भरतपुर के रुद्रांश खंडेलवाल ने एक पैर गंवाने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। किस्मत नहीं मेहनत के बल पर कामयाबी पाई। पिस्टल शूटिंग में विश्व रिकार्ड बनाया। उनकी कामयाबी को देखते हुए मोदी सरकार ने उन्हें अर्जुन अवार्ड दिया। पढ़ें एक सक्सेस स्टोरी।
Success Story : हम लोग अक्सर यह कहते हैं या दूसरों को कहते हुए सुनते हैं कि जो किस्मत में होगा वहीं मिलेगा, लेकिन भरतपुर में हादसे में अपने पैर गंवाने वाले एक युवक ने अपनी किस्मत नहीं बल्कि मेहनत के दम पर कामयाबी हासिल की। युवक ने हादसे के बाद खुदी को इतना बुलंद किया कि उसकी तरक्की उसके कदम चूमने लगी। हादसे में पैर गंवाने के बाद भी भरतपुर शहर के बापू नगर निवासी रुद्रांश खंडेलवाल ने हार नहीं मानी। पैरा शूटिंग में रुद्रांश को अर्जुन अवार्ड देने की घोषणा की गई है। उन्होंने वर्ल्ड कप में मेडल भी जीते। पेरिस पैरालिंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
भरतपुर के इतिहास में पहली बार किसी खिलाड़ी को राष्ट्रीय पुरस्कार के तहत अर्जुन अवार्ड की घोषणा की गई है। राज्यस्तर पर भले ही खिलाड़ियों को अवार्ड मिलते रहे हैं, लेकिन अर्जुन अवार्ड अभी तक किसी भी खिलाड़ी को नहीं मिला है।
रुद्रांश खंडेलवाल को साल 2015 में एक शादी समारोह में आतिशबाजी के दौरान हुई दुर्घटना में अपना एक पैर गंवाना पड़ा। आतिशबाजी ने मानो रुद्रांश की जिंदगी में अंधेरा भर दिया। अपने पैरों से वो नहीं चल सकते थे, इस दौरान माता-पिता ने रुद्रांश को उड़ने की हिम्मत दी। एयर पिस्टल शूटिंग में अब तक तीन दर्जन से अधिक पदक रुद्रांश अपने नाम कर चुके हैं।
रुद्रांश के पिता आशुतोष खंडेलवाल ने बताया कि 24 जनवरी 2015 को गिरीश रिसोर्ट में एक शादी समारोह में आतिशबाजी वाली तोप चल रही थी और उसी दुर्घटना में रुद्रांश बुरी तरह से घायल हो गया। दुर्घटना में रुद्रांश को अपना एक पैर गंवाना पड़ा।
रुद्रांश की मां विनीता खंडेलवाल ने बताया कि जब बेटा एक साल तक घर पर रहा तो वह दूसरे बच्चों को देखकर खेलने की इच्छा जताता था और पूछता था कि मम्मी क्या मैं भी खेल पाऊंगा। विनीता कहती हैं कि मैंने हमेशा रुद्रांश का हौसला बढ़ाया और उससे कहा कि बेटा तुम भी जरूर खेल पाओगे और दूसरे बच्चों की तरह स्कूल भी जाओगे।
विनीता खंडेलवाल आगे कहती हैं कि एक बार स्पोर्ट्स प्रभारी के रूप में बीएड कॉलेज की छात्राओं को लोहागढ़ स्टेडियम में लेकर गईं थी। यहां उन्होंने पहली बार एयर पिस्टल शूटिंग गेम देखा। उसके बाद यहां पर अपने बेटे रुद्रांश के लिए कोच से बात की। जिन्होंने बताया कि उनका बेटा भी इस खेल में आसानी से भाग ले सकता है। हालांकि रुद्रांश को स्पोर्ट्स अच्छा नहीं लगता था। ऐसे में रुद्रांश के लिए आर्टिफिशियल पैर भी तैयार कराया गया और फिर इस तरह से रुद्रांश ने अपनी नई दुनिया की शुरुआत की।
विनीता खंडेलवाल ने बताया कि शुरुआत में रुद्रांश को एयर पिस्टल शूटिंग की प्रैक्टिस में थोड़ी दिक्कत होती थी, लेकिन कुछ जरूरी एक्सरसाइज नियमित रूप से कराई गई और उसके बाद रुद्रांश धीरे-धीरे अपने खेल में आगे बढ़ता गया। रुद्रांश ने बताया कि वह हर दिन करीब दो से तीन घंटे तक अलग-अलग तरह की फिजिकल एक्सरसाइज करता था।
रुद्रांश ने बताया कि शुरू में प्रैक्टिस करने में बहुत परेशानी होती थी, लेकिन मम्मी-पापा का मुझे आगे बढ़ाने का सपना था और मैं उसे टूटने नहीं देना चाहता था। लगातार मैंने मन लगाकर प्रैक्टिस की और अपने मुकाम तक पहुंचा।
रुद्रांश ने बताया कि एक बार एक कंपटीशन के दौरान उसका आर्टिफिशियल पैर भी टूट गया, जहां मम्मी-पापा ने एक बार फिर से उन्हें आगे बढ़ते रहने की ताकत दी। 10 महीने में पहला स्टेट का रजत पदक मिला।
2023 में नेशनल में आठ मेडल, 2 नेशनल रेकॉर्ड के बाद इंडियन टीम में चयन हो गया। पहले वर्ल्ड कप की तैयारी की, लेकिन पांचवे स्थान पर आया। कई बार असफलता के कारण निराश हुई, लेकिन कभी हार नहीं मानी। अगले वर्ल्ड कप में 4 गोल्ड मेडल, तीन वर्ल्ड रेकॉर्ड बनाकर भरोसा हुआ।
पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप में 2 रजत पदक जीतकर इंडिया के लिए ओलंपिक कोटा प्राप्त किया। एशियन गेम्स चाइना में भी चयन हुआ। वहां दो रजत पदक जीतकर इंडिया का पहला युवा शूटर बना। अब पेरिस ओलंपिक 2024 में दिल्ली में रहकर नवां स्थान प्राप्त किया। 2025 में दोनों वर्ल्ड कप कोरिया व यूएई में 9 मेडल जीते।