
भरतपुर। राजस्थान कांग्रेस में नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद शुरू हुआ घमासान अब व्यक्तिगत आरोपों तक पहुंच गया है। पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने बुधवार को लगातार दो सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भरतपुर-डीग संगठन पर निशाना साधा। सुबह उन्होंने निकाय चुनाव में हार के लिए दोनों जिलाध्यक्षों को जिम्मेदार ठहराते हुए डोटासरा पर भी सवाल उठाए। इसके बाद जारी दूसरी पोस्ट में उन्होंने डोटासरा के परिवार और रिश्तेदारों के RAS चयन, OBC प्रमाण पत्र और REET को लेकर गंभीर आरोप लगाए और जांच की मांग की।
विश्वेंद्र सिंह ने सुबह ‘भरतपुर-डीग कांग्रेस का बंटाधार- जिम्मेदार कौन?’ शीर्षक से पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि दोनों जिलाध्यक्षों ने पार्टी के वास्तविक कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर अपने चहेतों को टिकट बांटे। उनके मुताबिक निकाय चुनाव में कांग्रेस की हार का यही प्रमुख कारण रहा।
विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि यह मुख्यमंत्री का गृह जिला है और यहां कांग्रेस मजबूत होनी चाहिए थी, लेकिन संगठन की कथित गलत कार्यप्रणाली से पार्टी कमजोर हुई। उन्होंने डोटासरा पर भी निशाना साधते हुए लिखा कि प्रदेश अध्यक्ष इस पूरे मामले पर ‘मूक-बधिर’ बने बैठे हैं। उनका दावा है कि जब तक दोनों जिलाध्यक्ष पद पर हैं, कांग्रेस का उठना मुश्किल है।
दूसरी पोस्ट में विश्वेंद्र सिंह ने 2016 और 2018 की RAS भर्ती का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि डोटासरा की पुत्रवधू प्रतिभा पूनिया और उनके भाई-बहन गौरव पूनिया व प्रज्ञा पूनिया को संबंधित RAS इंटरव्यू में समान 80-80 अंक मिले। दरअसल, प्रतिभा पूनिया को RAS-2016 और गौरव व प्रज्ञा को RAS-2018 में इंटरव्यू में 80 अंक मिलने को लेकर 2021 में विवाद उठा था। डोटासरा ने उस समय किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार करते हुए चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बताया था और कहा था कि रिश्तेदार होने से किसी को अंक नहीं मिलते।
विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा के पुत्र अविनाश सिंह के RAS-2016 चयन में OBC नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र के इस्तेमाल और डोटासरा के समधी रमेश चंद पूनिया के परिवार को OBC लाभ मिलने पर भी जांच की मांग की। इसके साथ ही पूर्व मंत्री ने डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहते REET में कथित धांधली का मुद्दा भी उठाया और राज्य सरकार से पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की।
विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा के बयाना में दिए गए कथित बयान-‘भरतपुर में तो रास्ता पूछने के भी पैसे ले लेते हैं’ पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे भरतपुर की जनता का अपमान बताया और कहा कि अगली बार डोटासरा भरतपुर आएंगे तो उन्हें रास्ता भी बताया जाएगा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चंद्रभान से बेहतर स्वागत-सत्कार भी किया जाएगा।
इन आरोपों के साथ ही पूर्व मंत्री ने डोटासरा के इस्तीफे या कांग्रेस आलाकमान से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ऐसे में निकाय चुनाव की हार से शुरू हुआ विवाद अब RAS, REET, संगठन और नेतृत्व के सवालों तक पहुंच गया है। फिलहाल डोटासरा की ओर से विश्वेंद्र सिंह के इन आरोपों पर प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।