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Chhattisgarh Politics: भिलाई नगर चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, देवेंद्र यादव की SLP हुई खारिज

Devendra Yadav SLP: भिलाई नगर चुनाव विवाद में प्रेम प्रकाश पांडेय को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। देवेंद्र यादव की SLP खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में निर्वाचन याचिका पर ट्रायल जारी रहेगा।
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Aug 25, 2026
Chhattisgarh Politics
सुप्रीम कोर्ट से प्रेम प्रकाश पांडेय को बड़ी राहत (photo source- Patrika)

Chhattisgarh Politics: भिलाई नगर विधानसभा चुनाव से जुड़े निर्वाचन विवाद में भाजपा नेता और पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव की विशेष अनुमति याचिका यानी SLP खारिज कर दी है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 30 जून 2026 के आदेश में हस्तक्षेप करने से भी सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है।

अब भिलाई नगर विधानसभा चुनाव से जुड़ी निर्वाचन याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई और ट्रायल की प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद देवेंद्र यादव की ओर से हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर फिलहाल विराम लग गया है।

सुप्रीम कोर्ट से प्रेम प्रकाश पांडेय को बड़ी राहत (photo source- Patrika)

Bhilai Nagar Assembly Election: क्या है पूरा मामला?

पूरा विवाद 65-भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव परिणाम और देवेंद्र यादव के निर्वाचन से जुड़ा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय ने निर्वाचन याचिका क्रमांक 9/2024 के जरिए देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती दी है। निर्वाचन याचिका में आरोप लगाया गया है कि देवेंद्र यादव की ओर से नामांकन के समय दाखिल किए गए शपथ-पत्र में कानून के तहत जरूरी जानकारी का समुचित रूप से खुलासा नहीं किया गया।

इसके अलावा याचिका में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत भ्रष्ट आचरण से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों के आधार पर पांडेय की ओर से यादव के निर्वाचन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में निर्वाचन याचिका दायर की गई है। इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपने-अपने दावे और आपत्तियां रखने का अवसर मिलेगा।

हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती

निर्वाचन मामले की सुनवाई के दौरान देवेंद्र यादव की ओर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के तहत आवेदन दाखिल किया गया था। इसमें उन्होंने निर्वाचन मामले के मुद्दा संख्या 2 और 4 को प्रारंभिक मुद्दों के रूप में तय करने की मांग की थी। ये दोनों मुद्दे नामांकन शपथ-पत्र में आवश्यक जानकारी के प्रकटीकरण और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 83 के अनुपालन से जुड़े थे।

यादव की ओर से मांग की गई थी कि इन मुद्दों का फैसला प्रारंभिक स्तर पर ही कर दिया जाए, ताकि निर्वाचन याचिका की आगे की प्रक्रिया पर उसका असर स्पष्ट हो सके। हालांकि 30 जून 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने देवेंद्र यादव की इस मांग को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने माना कि संबंधित मुद्दे केवल कानून के सवाल नहीं हैं, बल्कि इनमें तथ्य और कानून दोनों जुड़े हुए हैं। ऐसे मामलों का फैसला साक्ष्य सामने आने के बाद नियमित ट्रायल के दौरान करना उचित होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल नहीं दिया

हाईकोर्ट के इसी आदेश को देवेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके लिए उन्होंने SLP (Civil) No. 28778/2026 दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं पाया और देवेंद्र यादव की SLP खारिज कर दी। इसका सीधा असर यह है कि हाईकोर्ट में चल रही निर्वाचन याचिका की सुनवाई अपने निर्धारित तरीके से आगे बढ़ सकेगी। यानी जिन मुद्दों को प्रारंभिक स्तर पर तय करने की मांग की गई थी, उन पर अब साक्ष्य और नियमित ट्रायल की प्रक्रिया के दौरान विचार किया जाएगा।

पहले भी खारिज हो चुकी है एक SLP

भिलाई नगर निर्वाचन विवाद में देवेंद्र यादव की यह दूसरी महत्वपूर्ण SLP है, जिसे सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। इससे पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें आदेश VII नियम 11 CPC के तहत उनके आवेदन को खारिज किया गया था। देवेंद्र यादव ने हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ SLP (Civil) No. 6306/2025 के जरिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को भी 24 फरवरी 2026 को खारिज कर दिया था।

Devendra Yadav SLP: अब हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगा चुनाव विवाद

सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद भिलाई नगर विधानसभा चुनाव से जुड़ा मूल निर्वाचन विवाद अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में ही आगे बढ़ेगा। हाईकोर्ट में साक्ष्य और ट्रायल की प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन याचिका में लगाए गए आरोपों और उससे जुड़े कानूनी मुद्दों पर विचार किया जाएगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अर्थ यह है कि हाईकोर्ट के 30 जून 2026 के आदेश में कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया है।

इसलिए निर्वाचन याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खत्म करने या संबंधित मुद्दों का तुरंत अलग से फैसला करने की बजाय नियमित ट्रायल की प्रक्रिया जारी रहेगी। यह मामला भिलाई नगर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई और निर्वाचन याचिका के ट्रायल पर रहेगी।

Updated on:
25 Aug 2026 04:18 pm
Published on:
25 Aug 2026 04:18 pm