Bhilai Safai Controversy: करीब 700 सफाई कामगारों के रोजगार पर संकट की आशंका के बीच नेता प्रतिपक्ष और एमआईसी सदस्य आमने-सामने हैं।
Bhilai Safai Controversy: नगर निगम भिलाई की सफाई व्यवस्था को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। करीब 700 सफाई कामगारों के रोजगार पर संकट की आशंका को लेकर एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर जहां प्रस्ताव को खर्च घटाने वाला बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे रोजगार खत्म करने और सफाई व्यवस्था बिगाडऩे वाला कदम बताया जा रहा है।
एमआईसी सदस्य ने यह भी सवाल उठाया कि जो प्रस्ताव अभी एमआईसी और सामान्य सभा में प्रस्तुत नहीं हुआ, वह भाजपा पार्षदों तक कैसे पहुंच गया। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।
नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा का कहना है कि निगम आयुक्त द्वारा रखा गया नया प्रस्ताव 65 करोड़ की जगह 35 करोड़ में सफाई व्यवस्था संचालित करने का है। इससे निगम पर लगभग 30 करोड़ रुपए का आर्थिक बोझ कम होगा। उनका दावा है कि इस व्यवस्था में हर वार्ड को पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मी उपलब्ध रहेंगे और संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।
निगम के खाद्य, लोक स्वास्थ्य व स्वच्छता विभाग के अध्यक्ष लक्ष्मीपति राजू ने इस प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह योजना लागू होते ही हर वार्ड से औसतन 15 सफाई कर्मियों की कटौती होगी, जिससे करीब 700-800 कामगारों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। इससे शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा सकती है और कचरे का अंबार लगने का खतरा बढ़ेगा।
राजू का कहना है कि वर्तमान में सफाई का काम एजेंसी के माध्यम से होता है, जिसमें संसाधनों का खर्च एजेंसी वहन करती है। नए प्रस्ताव में डीजल और अन्य संसाधनों का खर्च निगम को उठाना पड़ेगा, जिससे वास्तविक खर्च बढ़ सकता है। वहीं नेता प्रतिपक्ष इसे खर्च कम करने वाला मॉडल बता रहे हैं।
यह पूरा विवाद दो प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित है… आर्थिक बचत बनाम रोजगार और व्यवस्था पर प्रभाव
सकारात्मक पक्ष: यदि प्रस्ताव के अनुसार कम लागत में सफाई व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित होती है, तो निगम के वित्तीय बोझ में कमी आ सकती है, जिससे अन्य विकास कार्यों के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे।
नकारात्मक पक्ष: यदि वास्तव में बड़ी संख्या में सफाई कर्मियों की कटौती होती है, तो इससे न केवल सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी, बल्कि जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था कमजोर पडऩे का जोखिम भी रहेगा।
मुख्य सवाल: क्या प्रस्ताव में कर्मचारियों की संख्या और संसाधनों का संतुलित आकलन किया गया है? क्या इसका प्रभाव पहले पायलट स्तर पर जांचा गया है? दरसअल, इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने से पहले निगम प्रशासन को पारदर्शिता के साथ दोनों पक्षों के तर्कों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करना होगा, ताकि शहर की सफाई व्यवस्था और श्रमिकों के हित दोनों सुरक्षित रह सकें।