भिलाई

Conocarpus Tree Ban: कोनोकार्पस पर सरकार ने लगाया बैन, लेकिन दुर्ग-भिलाई में अब भी खड़े हैं सैकड़ों खतरनाक पेड़

Conocarpus Ban: कोनोकार्पस पर छत्तीसगढ़ सरकार ने नए रोपण, बिक्री और प्रचार पर बैन लगाया। दुर्ग-भिलाई में पहले से लगे सैकड़ों पेड़ों को चरणबद्ध हटाने की तैयारी है।
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Aug 05, 2026
Conocarpus Tree Ban
कोनोकार्पस पर सरकार ने लगाया बैन (photo AI Image)

Conocarpus in Durg-Bhilai: विदेशी प्रजाति के सजावटी पौधे कोनोकार्पस पर छत्तीसगढ़ सरकार ने तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य के आवास व पर्यावरण विभाग तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने आदेश जारी कर इसके नए रोपण, बिक्री और प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी है। हालांकि, दुर्ग-भिलाई में पहले से लगाए जा चुके सैकड़ों कोनोकार्पस पेड़ों का क्या होगा, इसे लेकर स्थानीय स्तर पर अभी स्पष्ट कार्ययोजना सामने नहीं आई है।

नए पौधरोपण पर रोक लगाई

सरकार का यह निर्णय उच्चतम न्यायालय की ओर से गठित केंद्रीय सशक्त समिति की 21 अगस्त, 2025 की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। रिपोर्ट में कोनोकार्पस इरेक्टस को पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए आक्रामक व नुकसानदायक प्रजाति का बताया गया है। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा-5 के तहत इसके नए पौधरोपण पर रोक लगाई गई है।

विस्तृत कार्ययोजना घोषित नहीं

सरकार ने नए पौधों पर तत्काल रोक लगा दी है, लेकिन पहले से लगे पेड़ों को हटाने के लिए कोई विस्तृत कार्ययोजना घोषित नहीं की गई है। आदेश में केवल इतना कहा गया है कि मौजूदा कोनोकार्पस वृक्षों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह उपयुक्त देशी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएं।

इसलिए माना गया खतरनाक

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार कोनोकार्पस की गहरी जड़ें तेजी से भू-जल का दोहन करती हैं, जिससे आसपास के पेड़-पौधों और जल स्रा्रेतों पर प्रतिकूल असर पड़ता है। यह स्थानीय वनस्पतियों के विकास में बाधा बनकर जैव विविधता को नुकसान पहुंचाता है। इसके परागकण और पत्तियां अस्थमा, एलर्जी, त्वचा और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकती हैं।

शहर के प्रमुख स्थानों पर पहले से मौजूद हैं पौधे

दुर्ग-भिलाई में ठगड़ा बांध सौंदर्यीकरण परियोजना के दौरान पाथवे के दोनों ओर बड़ी संख्या में कोनोकार्पस लगाए गए थे। इसके अलावा जिला और जनपद पंचायत परिसर, गौरव पथ, रानी दुर्गावती प्रतिमा स्थल समेत कई सरकारी परिसरों और सार्वजनिक स्थलों पर भी यह पौधे वर्षों पहले लगाए जा चुके हैं और अब बड़े वृक्ष बन चुके हैं।

कोनोकार्पस पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। शासन के निर्देश मिल चुके हैं। शहर में पहले से बड़ी संख्या में ऐसे पौधे लगे हैं। निर्देशानुसार इन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाकर इनके स्थान पर अन्य उपयुक्त पौधे लगाए जाएंगे।

काशीराम कोसरे, प्रभारी, पर्यावरण एवं उद्यानिकी विभाग, नगर निगम दुर्ग

Updated on:
05 Aug 2026 02:20 pm
Published on:
05 Aug 2026 02:16 pm