
भिलाई .भिलाई इस्पात संयत्र की नीव रखने के साथ ही सिविक सेंटर एक मार्केट के रूप में स्टे्रबलिश होने लगा। शुरुआत में व्यापारी नीचे बैठकर दुकानें लगाया करते थे। 60 के दशक में इसे पहचान मिलना शुरू हो गई। बीएसपी ने एक लाइन से पचास दुकाने बनाई, जिसमें देश की नामी कंपनियों ने अपने स्टोर खोले। उसी समय हमने भी अपने स्टोर की ओपनिंग की। अब तो दर्जनों छोटे-बड़े मार्केट बन गए है, लेकिन उस दौर में सिविक सेंटर को ही सबसे खास मार्केट माना जाता था। बीएसपी में इंजीनियर बनकर आए रशियंस की यह मार्केट पहली पसंद थी। वे शाम को ड्यूटी से छूटते ही यहां सैर-सपाटे के लिए रोजाना आते थे। मुझे आज भी याद है रशियंस इसे कनॉट प्लेस कहते थे। सैकड़ों की तादाद में साइकिल पर खरीदारी और मनोरंजन के लिए रोजाना लोग यहां पहुंचते थे। अब इनकी जगह बड़ी-बड़ी गाडिय़ों ने ले ली है।
(जैसा कि सिविक सेंटर के सबसे पुराने व्यापारियों ने बताया)
मिनी ट्रेन बनी बच्चों की फेवरेट
60 के दशक तक प्लांट बनकर तैयार हो चुका था। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र पर यहां विशेष एग्जीबिशन लगाई जाती थी, जिसमें प्लांट के भीतर होने वाले कार्यों के बारे में लोगों को जानकारी मिलती। यह बिल्कुल मेले जैसा रहता। यह सब याद कर अब भी चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। जहां अभी टै्रफिक पार्क है, पहले वहां एग्जीबिशन के दौरान बच्चों के लिए मिनी ट्रेन चलाई जाती थी। लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते। यह टे्रन कुछ सात या आठ साल तक चली बाद में इसे मैत्रीबाग भेज दिया गया, लेकिन इसकी पटरियां अब भी चौपाटी और टै्रफिक पार्क में मौजूद है।
गौर से देखिए आज भी है पुरानी इमारत
बीएसपी की बनाई पुरानी दुकानों पर अगर आप नजर दौड़ाएंगे तो पता चलेगा कि कुछ व्यापारियों ने इसे आज भी सहेज कर रखा है। हां.. थोड़े रेन्यूट हुए है, लेकिन उनकी मूल डिजाइनिंग वैसी ही है। जो लोग इस शहर को पहचानते हैं, वे इसे देखकर खुश हो जाते है। पचास साल में सिविक सेंटर ने अनगिनत बदलाव देखे हैं। पहले यह बाजार के लिहाज से सबसे अहम था और अब प्रदेश भर में एंटरटेनमेंट हब के नाम से पहचान रखता है। हमारे युवाओं का तो यह सबसे पसंदीदा प्लेस है।
पूरे सीसी में होते थे तीन ठेले
आज सिविक सेंटर में सैकड़ों प्रकार के व्यंजनों का स्वाद आपको एक ही जगह पर मिल जाता है। लेकिन शुरुआती दौर में यहां न तो यहां कोई होटल था और न ही खाने-पीने की चीजों की अच्छी व्यवस्था। पूरे सीसी में सिर्फ दो या तीन नाश्ते के ठेले लगते थे। अब तो यहां दर्जनों बड़े रेस्टोरेंट हैं। तो वहीं चौपाटी में सैकड़ों व्यंजनों के ठेले।
सुबह से रहती दुकानों पर भीड़
सच कहूं तो यह मार्केट आज भी सबसे स्टैंडर्ड है। शुरुआती दौर में बड़ी कंपनियों के स्टोर्स सिर्फ यहीं थे। डेली नीड्स का तो पूरा मार्केट ही था। हम सुबह ७ बजे दुकान पहुंचते तो लोग पहले से खड़े मिलते। दुकाने खोलने के दौरान ही जोरदार कमाई करना शुरु कर देते। गांव-देहात से आए लोग बंडी में बैठकर राशन का सामान खरीदने आते तो वहीं उन्हें एक ही जगह पर कपड़े और दूसरी चीजें भी मिलती। यह नजारा आज भी वैसे ही है। हमारा सिविक सेंटर सिटी की शान है हमेशा रहेगा।