
भिलाई. आप जानकर हैरत में पड़ जाएंगे कि भिलाई की कुछ महिलाओं ने अपनी सकारात्मक सोच से ऐसा समाज रच डाला, जिसने सरकार से कई साल पहले यहां मिड-डे मील की व्यवस्था लागू कर दी थी। साठ साल पहले भिलाई इस्पात संयंत्र के निर्माण के समय यहां आए अधिकारियों की पत्नियों ने समाज सेवा को सोच को धरातल पर उतारने की सोची थी। कैंप क्षेत्र में टेंट में रहने वाले मजदूरों के परिवार की औरतों को घर से बाहर निकालकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने से यह सफर शुरू हुआ। इस तरह भिलाई महिला समाज की नींव पड़ी।
भिलाई महिला समाज की संस्थापक नलिनी श्रीवास्तव बीएसपी के दूसरे जनरल मैनेजर निर्मलचंद श्रीवास्तव की पत्नी थी। 1957 में उन्होंने कुछ अधिकारियों की पत्नियों को लेकर भिलाई महिला समाज की स्थापना की। उस दौरान टैंट में रहने वाले कर्मियों की पत्नियों के पास जाकर वे बच्चों को शिक्षा से जोडऩे का काम करने लगी।
सेक्टर 4 के एक क्वार्टर में 150 बच्चों से एक स्कूल शुरू किया। उस दौरान पहली बार बच्चों के लिए मिड-डे मील की सुविधा भी भिलाई महिला समाज ने देनी शुरु की। शुरुआत में तो कैंटीन वाले ही खाना भेजते थे,लेकिन क्वाटिली अच्छी नहीं होने के कारण अध्यक्ष नलिनी ने खुद ही भोजन तैयार करने का निर्णय लिया। ऐसे में उन बच्चों की माताओं को भी साथ में जोड़ा और वे सभी मिलकर बच्चों के लिए खाना बनाने लगे।
इसी बीच बच्चों की यूनिफार्म की बारी आई तो पहले सभी बाहर यूनिफार्म सिलाते थे, तभी सभी ने मिलकर निर्णय लिया कि कैंप में रहने वाली महिलाओं को सिलाई का काम दिया जाए ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें। फिर क्या था 1961 में भिलाई महिला समाज की सबसे पहली सिलाई यूनिट की नींव पड़ गई। आज सिलाई यूनिट में प्लांट के लिए हजारों यूनिफार्म भी तैयार किए जा रहे हैं और यहां कई महिलाओं को स्थाई रोजगार भी मिल रहा है। भिलाई महिला समाज हर साल 4 अगस्त को अपना स्थापना दिवस मनाता है।
प्रदेश का पहला पेट्रोल पंप जिसे महिलाएं चलाती हैं
भिलाई इस्पात संयंत्र की तरह भिलाई महिला समाज भी उपलब्धियों की दास्तां लिखता रहा। साठ साल के सफर में 6 स्थाई यूनिट के साथ भिलाई महिला समाज सशक्त रूप से खड़ा है। इनमें 2 सौ से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बन सशक्तिकरण का सपना साकार कर रही हैं।
प्रदेश का पहला महिला पेट्रोल पंप भी भिलाई महिला समाज की ही देन है। यहां वर्कर से लेकर मैनेजर तक सभी महिलाएं ही है। समृद्धि फ्यूल्स में महिलाओं की भागीदारी को देखने के बाद अब शहरभर के पेट्रोल पंप में महिलाकर्मी ही नजर आती हैं।
साबुन व मसालों से सुरक्षा सामग्री तक
एक सशक्त और समृद्ध महिला समाज जो भिलाई स्टील प्लांट की जरूरत भी बन चुका है। साबुन, स्टेशनरी, दस्ताने, कैंटीन में उपयोग होने वाले मसाले और अनाज की सप्लाई भी भिलाई महिला समाज कर रहा है।
इतिहास के पन्नों को पलटे तो भिलाई महिला समाज ने ही इस औद्योगिक तीर्थ की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। इसमें पांच सौ से ज्यादा महिलाएं विभिन्न क्लब के माध्यम से सेवाकार्य में भी जुटी हुई हैं।
Published on:
15 Mar 2018 02:14 pm
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