
Padma Vibhushan Teejan Bai: विश्व पटल पर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति व पंडवानी गायन को नई पहचान दिलाने वाली पद्मश्री, पद्मभूषण व पद्मविभूषण से सम्मानित लोक कलाकार स्व. डॉ. तीजन की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने कई घोषणाएं की गई हैं। गृहग्राम गनियारी में आयोजित दशगात्र व श्रद्धांजलि सभा में सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि उनका योगदान केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर है और आगामी पीढिय़ां भी उससे प्रेरणा लेती रहें, इसके लिए सरकार ठोस पहल करेगी।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्योत्सव के मुख्य समारोह में लोककला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को प्रतिवर्ष 'डॉ. तीजन बाई राज्य स्तरीय लोककला अलंकरण' से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सम्मान लोक कलाकारों के लिए प्रेरणा बनेगा और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने गनियारी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नाम बदलकर 'स्व. डॉ. तीजन बाई शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय' करने की घोषणा की। साथ ही पंडवानी गायन के दौरान उनकी पहचान बन चुके तंबूरे को रायपुर के केंद्रीय संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा, ताकि उनकी कला और जीवन यात्रा का साक्ष्य आने वाली पीढिय़ों तक सुरक्षित पहुंच सके।
श्रद्धांजलि सभा में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इस अवसर पर सांसद विजय बघेल, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, विधायक एवं पद्मश्री अनुज शर्मा, विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, पद्मश्री आर.एस. बारले सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रदेशभर से पहुंचे हजारों कलाकार और ग्रामीण उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई के अस्वस्थ होने पर राज्य सरकार ने उनके उपचार के लिए हरसंभव व्यवस्था की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। उनके निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की ओर से व्यक्त शोक संवेदनाएं उनके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान की पुष्टि करती हैं। मुख्यमंत्री ने उनके तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर परिजन को सांत्वना भी दी।