यूआरएम के शेड का निर्माण जर्मनी की तकनीक के मुताबिक किए हैं। इस शेड का निर्माण किया गया है जो भारतीय वातावरण के अनुरूप नहीं है.
भिलाई. भिलाई स्टील प्लांट के यूनिवर्सल रेल मिल (यूआरएम) में चारों ओर अव्यवस्था का आलम है। डब्लूटीपी क्रेन-1, 2, 3 के ऊपर कोई शेड नहीं है। एक छोटा अस्थाई शेड का निर्माण किए हैं जो असुरक्षित है। इसमें कोई भी कर्मचारी खड़े होकर कार्य नहीं कर सकता। क्रेन के उपकरण खुले में पड़े हैं। बारिश में शॉर्ट सर्किट होने की आशंका बनी रहती है। यूआरएम से दौरा कर लौटी एचएमएस की टीम ने यह बताया। महासचिव प्रमोद मिश्रा ने बताया कि इस तरह की स्थिति में कभी भी कोई हादसा हो सकता है।
सिर्फ रेल वेल्डिंग सैक्शन खुले आसमान के नीचे
संयंत्र में रेल वेल्डिंग सैक्शन के वेल्डिंग करने वाले हिस्से को छोड़कर बाकी हिस्सा खुले आसमान के नीचे चल रहा है। ऐसी स्थिति में उपकरणों के जल्द ही खराब होने की आशंका है।
जर्मनी के वातावरण के मुताबिक भिलाई में बनाया शेड
यूआरएम के शेड का निर्माण जर्मनी की तकनीक के मुताबिक किए हैं। वहीं कामगारों के मुताबिक इस शेड का निर्माण किया गया है जो भारतीय वातावरण के अनुरूप नहीं है। क्रास वेंटिलेशन की कोई व्यवस्था नहीं है। क्रेन का एसी खराब हो जाय तो क्रेन ब्रेक डाउन हो जाता है। पूरे यूआरएम का डिजाइन ऑटोमेशन के मुताबिक बनाए हैं। वहीं काम को मैनुअल करवाया जा रहा है। मेन पॉवर ऑटोमेशन के मुताबिक निर्धारित किए हैं।
प्रोजेक्ट में इस वजह से हुई देरी
बीएसपी के यूआरएम का ठेका दो कंपनी एसएमएस मीर व मैकेनरी भारत ने मिलकर लिया था, जिसमें मेकनरी भारत बीच में काम छोड़कर चली गई। इसके साथ-साथ उनकी कई सहायक कंपनियां भी बीच में काम छोड़कर चली गई दोबारा टेंडर होने पर कार्य करने वाली कंपनियों में आपसी सामंजस्य ना होने के कारण प्रोजेक्ट की गुणवत्ता प्रभावित हुई और प्रोजेक्ट में विलंब हुआ।
कार्मिकों के लिए रेस्ट रूम तक नहीं
यूआरएम में कर्मचारी दूसरे विभागों के साथ-साथ राजहरा खदान से भी तबादला होकर आए हैं। काम के दौरान कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यूआरएम के पंप हाउस का काम ठेका कंपनी आधा अधूरा छोड़कर चली गई है तथा अब तक इतने बड़े पंप हाउस के संचालन व अनुरक्षण की जिम्मेदारी निर्धारित नहीं की गई है। यूनियन ने प्रबंधन से कैंटीन में सुविधाएं बढ़ाने की मांग कर रहा है। यहां कर्मचारियों के लिए कोई रेस्ट रूम नहीं है। इसकी व्यवस्था जरूरी है।
मजबूरी में शुरू कर दिए अधूरे प्रोजेक्ट को
यूनियन ने कहा कि आधे-अधूरे प्रोजेक्ट को चालू करने के कारण उत्पादन में रूकावट व परेशानी झेलना पड़ रहा है। इसे देखते हुए पहले यूनियन ने गेट-मीटिंग के माध्यम से कई सप्ताह तक ब्लास्ट फर्नेस 8, एसएमएस-3, अन्य प्रोजेक्ट को हैंडओवर लेते समय इन सब बातों को ध्यान में रखना चाहिए था। पहले किसी यूनिट का प्रबंध निर्देशक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर का सदस्य होता था व यूनिट की समस्याओं को मीटिंग में रखा जाता था। इतना ही नहीं उसका निदान भी होता था। एसएमएस-3, बैटरी-11, प्लेटमिल में इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं, अब इस पद को सीईओ का नाम देने से बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में अपनी बात रखने का मौका समाप्त हो गया है। यह किसी भी यूनिट के लिए ठीक नहीं है।
प्रबंधन के सामने रखी बात
यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने उप महाप्रबंधक प्रभारी मिलिंद गदरे से मुलाकात कर चर्चा की। डीजीएम ने यूआरएम की समस्याओं को स्वीकार किया। उन्होंने उसे दूर करने के लिए उच्च प्रबंधन से चर्चा करने की बात कही। इस मौके पर कार्यवाहक अध्यक्ष प्रेम सिंह चंदेल, उप महासचिव एसएम वजी अहमद, डीके सिंह, शंकर साव, अरुण श्रीवास्तव मौजूद थे।