
NH-53 Road Condition: नेशनल हाईवे-53 पर नेहरू नगर से कुम्हारी तक फोरलेन और कुम्हारी खारुन नदी पुल की सड़क राहगीरों के लिए मुसीबत बन गई है। 16.53 करोड़ रुपए की लागत से हुई मरम्मत एक बारिश भी नहीं झेल पाई। डामर बह गया, सड़क उखड़ गई और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए।
पत्रिका में गड्ढों की खबर प्रकाशित होने के बाद रविवार को ठेकेदार ने आनन-फानन में गड्ढों को गिट्टी के चूरे और डस्ट से भर दिया। गड्ढे भरने के दौरान एनएच के जिम्मेदार इंजीनियर भी मौके पर मौजूद थे। अब सड़क से धूल के गुबार उठ रहे हैं। राहगीरों की आंखों में धूल जा रही है। धूल के गुबार के कारण सड़क से गुजरने वालों को बेहद परेशानी हो रही है।
सड़क किनारे रहने वाले लोगों के घरों की छतों और दुकानों के सामान पर डस्ट की परत जम रही है। कोसानगर निवासी राकेश साहू ने बताया कि निर्माण को छह महीने भी नहीं हुए और अब धूल भरी हवा झेलनी पड़ रही है। दुकान संचालक रमेश विश्वकर्मा ने कहा कि सामानों पर धूल जम रही है और साफ करते-करते परेशान हैं। सड़क सुरक्षा माह की बैठक में ट्रैफिक अधिकारियों ने कलेक्टर अभिजीत सिंह को पहले ही गड्ढों और डिवाइडर की डिजाइन की खामियों से अवगत कराया था, फिर भी सुधार नहीं हुआ।
सवाल: कोसानाला सड़क के गड्ढों पर गिट्टी का चूरा आपने डलवाया है या एनएच के इंजीनियरों ने?
जवाब: हमने ही डलवाया है।
सवाल: डस्ट और गिट्टी से धूल उड़ रही है, लोग परेशान हैं। कंक्रीट डलवाना बेहतर नहीं होता?
जवाब: आप तो ऐसे बोल रहे हैं, जैसे धूल-डस्ट से 10-20 लोग अस्पताल में भर्ती हो गए हैं। क्या है कि सिर्फ गिट्टी टिकती नहीं है। जब तक उसमें डस्ट नहीं मिलेगा, वह गड्ढे में टिकेगी ही नहीं।
सवाल: 10-20 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, यह तो मैंने नहीं कहा, लेकिन धूल के गुबार से राहगीर परेशान हो रहे हैं।
जवाब: 15 अक्टूबर से पहले स्थायी काम करा देंगे। तब तक लोगों को धूल झेलनी पड़ेगी।
जयंत वर्मा, सब इंजीनियर, एनएच-53 के मुताबिक, सड़क के गड्ढों को भरने के लिए डब्ल्यूएमएम मटेरियल का उपयोग किया जा रहा है। इसकी ग्रेडिंग में धूल, जीरा और 25 एमएम तक का मटेरियल शामिल होता है, जो सड़क को मजबूती से कंपैक्ट करने में मदद करता है। धूल को नियंत्रित करने के लिए कल पानी का छिड़काव (Bhilai News) कराया जाएगा। साथ ही, सड़क पर जो गड्ढे अभी बचे हुए हैं, उनकी भी फिलिंग कराकर सड़क को दुरुस्त किया जाएगा।