CG News: बेमेतरा में नुक्कड़ नाटक को बढ़ावा देकर लोगो को जागरूक करते रहे। पहले बेमेतरा में कविता पाठ करना प्रारंभ किया, जो देश के प्रसिद्ध हास्य कवि बनें।
CG News: हास्य विधा के अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे हमारे बीच नहीं रहे। उनके जाने के बाद हास्य की दुनिया लगभग थम-सी गई। लोगों को हर बात में अपनी कविताओं के माध्यम से हंसाने-गुदगुदाने वाले के अचानक दुनिया से विदा लेने के बाद साहित्य-जगत में मायूसी छा गई। उनके निधन पर साहित्य, पत्रकारिता व चिकित्सा जगत के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
कवि सुरेन्द दुबे के आकस्मिक निधन पर उनके जन्मस्थली बेमेतरा शहर में शोक का माहौल व्याप्त है। स्व. दुबे के गंजपारा स्थित पैतृक निवास में लोग पहुंचे थे। वही परिवार के लोग आज सुबह से ही दुर्ग व रायपुर रवाना हो चुके थे। स्व. दुबे के पड़ोसी, बुजुर्ग साथी व नागरिकों ने शोक जताया है। डॉ. दुबे लंबे समय तक दुर्ग में रहे। दुर्ग से मंचीय कवि के रूप में उनको पहचान मिली।
उनके बालसखा गंगाधर शर्मा ने बताया कि उनका बचपन से ही मंच के प्रति लगाव रहा है। पहले राम का पाठ करते थे। बेमेतरा में नुक्कड़ नाटक को बढ़ावा देकर लोगो को जागरूक करते रहे। पहले बेमेतरा में कविता पाठ करना प्रारंभ किया, जो देश के प्रसिद्ध हास्य कवि बनें। गंजपारा निवासी श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया उनके निधन से पूरे बेमेतरा में शोक का माहौल हैं।
संजय तिवारी ने बताया डॉ. दुबे अपने पिता गर्जन सिंह दुबे के साथ रामलीला में आया करते थे, जो समय-समय पर अभिनय भी किया करते थे। डॉ. दुबे कविता पाठ के दौरान लगभग सभी मंच में छत्तीसगढ़ियों के जीवनशैली व बात व्यवहार को लेकर अपनी रचनाओं का वाचन करते रहे। इस बीच वे बेमेतरा की माता भद्रकाली, राम मंदिर, रामलीला, शहर का पुराना बस स्टैन्ड, कॉलेज, बाजार व पिकरी को कविताओं में स्थान जरूर देते थे।
नुक्कड़ नाटक - 1980-90 के दशक में बेमेतरा शहर में नुक्कड़ नाटक, लेखन, रामलीला व मंचीय कार्यक्रम के साथ कवि पाठ कर लोगों को अपनी कविता से रिझाने से लोकप्रियता सीढ़ी चढ़ने वाले स्व. दुबे के पड़ोसी नरसिंग नदंवाना ने बताया कि रामलीला में राम व शत्रुहन का अभिनय करते थे। बेमेतरा जब भी आते अपने पैतृक निवास जरूर जाते। कमी हमेशा खलती रहेगी।
नुक्कड़-नाटक के लेखन में भी रहे माहिर
साहित्यकार, उदघोषक, रंगकर्मी दिनेश गौतम ने बताया कि डॉ. दुबे नुक्कड़ नाटक के अच्छे लेखक रहे। उनके लिखे नाटक गस्त जारी है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय ये लोकप्रिय नुक्कड़ नाटक रहा है। उनके लेखन से तैयार किए नुक्कड़ नाटक में स्वयं दिनेश गौतम, निर्मल ताम्रकार, रूद्र शर्मा, संजय दुबे, विष्णु सोनी सहित कई रंगकर्मियों ने अभिव्यक्त नाटॺ मंच तैयार कर रचनाओं को जीया है। उनकी कमी बेमेतरा नाटय जगत में हमेशा रहेगी।