Suraksha Kavach SOP: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद सड़कों पर खुले में घूमते और झुंड बनाकर बैठे मवेशी लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।
Suraksha Kavach SOP: छत्तीसगढ़ के भिलाई जिले में सड़क सुरक्षा के नाम पर योजनाएं तो बहुत बनीं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद सड़कों पर खुले में घूमते और झुंड बनाकर बैठे मवेशी लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। बीते 20 महीनों में 8 लोग ऐसे हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं। कई मवेशी भी वाहनों से टकराकर मौत का शिकार बने हैं।
नेशनल हाइवे हो, स्टेट हाइवे या फिर गांवों की सड़कें, हर जगह मवेशियों का कब्जा आम दृश्य है। शासन ने व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए, लेकिन नगर निगमों और पंचायत निकायों की सुस्ती के चलते हालात में कोई खास बदलाव नहीं आया। हर महीने होने वाली सड़क सुरक्षा बैठक में निर्णय तो होते हैं, लेकिन कार्रवाई फाइलों में बंद रह जाती हैं।
दुर्ग जिले में सड़कों पर घूमते मवेशी लगातार दुर्घटनाओं की वजह बन रहे हैं। बढ़ते हादसों को रोकने के लिए परिवहन विभाग ने विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) तैयार की है। इसमें संवेदनशील स्थानों की पहचान, मवेशियों का वैज्ञानिक प्रबंधन, आपदा स्थिति में राहत व्यवस्था और जनजागरूकता अभियान शामिल हैं। सभी संबंधित विभागों को इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
रायपुर-भिलाई मार्ग पर रोजाना यात्रा करने वाले व्यापारी संजय गुप्ता कहते हैं कि ‘निकाय न तो लावारिस गौवंश पर रोक लगाता है, न इन्हें सड़क पर छोड़ने वालों का पता लगा पाता है। हादसे लगातार बढ़ रहे हैं।’ समाजसेवी पीयूष अग्रवाल का कहना है कि ‘हाईवे पर सफर करते समय सबसे ज्यादा डर झुंड में बैठे मवेशियों से रहता है। सिस्टम इनकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं दिखता।’
ट्रैफिक पुलिस कुछ स्थानों पर मवेशियों को हटाने और रात के समय रेडियम लगाने का काम कर रही है, लेकिन यह अस्थायी समाधान है। स्थायी व्यवस्था के अभाव में हादसों का खतरा बना हुआ है।
नोट: इनके अलावा रोजाना कई छोटे हादसे होते हैं, जिनकी शिकायत दर्ज नहीं होती।
एएसपी ट्रैफिक ऋचा मिश्रा ने कहा की मवेशियों को हटाने और रेडियम लगाने का काम किया जा रहा है, लेकिन इन्हें व्यवस्थित स्थान पर शिफ्ट करना सबसे ज़रूरी कदम है। शासन स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो हादसे बढ़ेंगे।