भिलाई

दूसरों को फर्जी ऋृण पुस्तिका से जमानत दिलाने वाला शख्स खुद की जमानत के लिए लगा रहा चक्कर

जिला न्यायालय में फर्जी ऋण पुस्तिका से जमानत लेने वाले सरगना वेदप्रकाश उर्फ गुड्डा हाईकोर्ट के आदेश पर भी जेल से बाहर नहीं आ पाया है।
2 min read
Jan 10, 2018
durg news,court news,durg crime news,Durg district Court, Fake bail gangster

दुर्ग . जिला न्यायालय में फर्जीऋण पुस्तिका से जमानत लेने गिरोह बनाकर गोरखधंधा करने वाले सरगना वेदप्रकाश उर्फ गुड्डा को हाईकोर्ट के आदेश पर भी वह जेल से बाहर नहीं आ पाया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर आरोपी वेदप्रकाश ने न्यायाधीश मोहन सिंह कोर्राम के न्यायालय में जमानत के लिए ऋण पुस्तिका प्रस्तुत करते हुए रिहाई आदेश जारी करने आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन न्यायाधीश ने हाईकोर्ट की गाइडलाइन का हवाला देते हुए प्रस्तुत ऋण पुस्तिका को जांच के लिए राजस्व न्यायालय भेज दिया।

नई गाइडलाइन के कारण अब जमानत की प्रक्रिया जटिल
खास बात यह है कि आरोपी वेदप्रकाश के जमानत आवेदन पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा ने गाइड लाइन जारी किया है। नई गाइडलाइन के कारण अब जमानत की प्रक्रिया जटिल हो गई है। दस्तावेज के प्रमाणीकरण के बाद ही अब आरोपियों को जमानत पर रिहा किया जाएगा। प्रकरण के मुताबिक वेद प्रकाश फर्जी ऋण पुस्तिका के आधार पर आरोपियों का जमानत लेता था। इसके एवज में वह मोटी रकम लेता था। आरोपी वर्ष २०१६ से सेंट्रल जेल दुर्ग में निरुद्ध है। अधिवक्ताओं का कहना है कि दस्तावेज को प्रमाणीकरण कराने में कम से कम ५-७ दिन लगेगा। तब तक आरोपी को जेल में ही रहना होगा।

नगद राशि के आधार पर जमानत लेना विकल्प
आमतौर पर गैर जमानती धारा पर बेल लेना आसान होता था। मकान का पट्टा, रजिस्ट्री पत्र या फिर ऋण पुस्तिका प्रस्तुत कर लोग जमानत ले लेते थे। नई गाइडलाइन लागू होने पर पहले ऋण पुस्तिका व अन्य दस्तावेज पर सत्यापित करा रहे हैं। ऐसे में अब अधिवक्ता आरोपी को जेल जाना न पड़े इसके लिए अब न्यायालय में नकद राशि जमा कर जमानत दिए जाने आवेदन प्रस्तुत कर रहे हैं। खास बात यह है कि नगद राशि से जमानत लेने पर प्रकरण के निराकरण के बाद अपील नहीं होने की दशा में न्यायालय से वापस मिलती है।

पहले जमानत की व्यवस्था के बाद देगें गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक कई प्रकरणों के आरोपी पहले जमानत की व्यवस्था कर रहे है। ऋणपुस्तिका सत्यापन से लेकर बी वन नकल लेने आवेदन प्रस्तुत कर रहे है। औपचारिक्ता पूरी करने तक पुलिस से मोहलत मांग रहे हैं। पूर्व में पुलिस आरोपी को डेट देते हुए चालान प्रस्तुत करने और अनिवार्य रुप से उपस्थित होकर जमानत कराने की सूचना दे दी थी। सूचना के आधार पर आरोपी अधिवक्ता के माध्यम से सीधे न्यायालय में उपस्थित होकर जमानत लेकर जेल जाने से बच जाते थे।

Published on:
10 Jan 2018 08:45 pm