
दुर्ग . जिले से कुष्ठ को खत्म करने अभियान चलाया जा रहा है। हर साल नए मरीजों को चिन्हित कर उसे योजना के तहत मुफ्त दवा दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि एक वर्ष के कोर्स के बाद शरीर से कुष्ठ के कीटाणु खत्म हो जाते हैं। जबकि हकीकत यह है कि कोर्स पूरा करने के बाद भी एक महिला का जख्म ठीक नहीं हुआ और उसकी मौत हो गई।
पुलगांव क्षेत्र की गीता यादव मौत
ऐसा ही मामला सोमवार को पुलगांव क्षेत्र में सामने आया है। 40 वर्ष की गीता यादव के पैर में गर्म माढ़ गिरने से बना जख्म बढऩे लगा, और वही मौत का कारण बन गया। मृतक महिला के पति का कहना था कि चिकित्सकों ने दवा खत्म होने के बाद किसी तरह की एहतियात बरतने या फिर दोबारा रोग की शिकायत होने पर क्या करना है इसकी जानकारी नहीं दी थी। एक वर्ष तक गीता ने नियमित दवा का सेवन किया। दोबारा मितानीन से संपर्क किया तो उसने कहा कि एक वर्ष तक ही दवा दी जाता है। अब दवा की आवश्यकता नहीं है, लेकिन जख्म बढ़ता जा रहा था। जख्म बढऩे के बाद अतत: उसकी मौत हो गई। गंभीर हालत में उसे दुर्ग जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के दौरान मृत घोषित कर दिया।
जिले में कुष्ठ के मरीज की स्थिति
कुल मरीज-624
इस वर्ष चिन्हित-144
संवेदनशील क्षेत्र- सभी श्रमिक बाहूल्य क्षेत्र, खास तौर पर गंाधी नगर, डिपरा पारा, पुलगांव घनी आबादी वाला क्षेत्र, ओडिय़ा बस्ती, खुर्सीपार, केम्प एक क्षेत्र, मदर टेरेसानगर, छावनी क्षेत्र
इन्हे दी जाती कोर्स
पीबी मरीज- ऐसे मरीज जिनके शरीर पर कुष्ठ के दाग की संख्या पांच है और दाग के बढ़ते क्रम है। दाग वाले स्थान में शून्यता है उन्हें छह माह का कोर्स दिया जाता है।
एमबी- ऐसे मरीज जिनके शरीर पर कुष्ठ के दाग की संख्या पांच से अधिक है। और शरीर में विकृति या फिर जख्म ऊभरना शुरू हो गया है। उन्हे एक वर्ष का कोर्स दिया जाता है।
मृत्यु का कारण बर्न एण्ड शॉक
नोडल अधिकारी डॉ. एसके मंडल ने बताया कि कुष्ठ से किसी मरीज की मौत नहीं होती। एमबी कोर्स एक वर्ष का ही है। उससे अधिक हम दवा नहीं दे सकते। जिस महिला की मौत होना बताया जा रहा है उसका मृत्यु का कारण बर्न एण्ड शॉक है।
Published on:
09 Jan 2018 10:32 pm
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