- नैनो यूरिया-डीएपी के प्रदर्शन शुरू, दानेदार यूरिया से 50 प्रतिशत तक सस्ती - जिले में यूरिया की निरंतर आपूर्ति जारी, किसानों को वैज्ञानिक छिड़काव के लिए किया प्रेरित
भीलवाड़ा रबी की फसलों में पहली सिंचाई के समय आवश्यक नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए कृषि विभाग ने किसानों को पारंपरिक दानेदार यूरिया के साथ नैनो यूरिया के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया है। कृषि विभाग की ओर से जिलेभर में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के प्रदर्शनों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि किसान इसके लाभों से परिचित हो सकें।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक विनोद कुमार जैन ने बताया कि नैनो तकनीक न केवल उत्पादन बढ़ाती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता में भी सुधार करती है।
जैन ने बताया कि नैनो यूरिया का वैज्ञानिक तकनीक से फसलों पर छिड़काव किया जाए तो यह अधिक लाभदायक सिद्ध होता है। इसके उपयोग के कई बड़े फायदे हैं। नैनो तरल यूरिया दानेदार यूरिया से सस्ती होती है, जो किसानों के लिए लागत कम करने का साधन है। इसके प्रयोग से जल, भूमि एवं वायु प्रदूषण से बचा जा सकता है, क्योंकि यह मृदा की उर्वरा क्षमता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं डालता है।
किसानों को नैनो यूरिया के उपयोग के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। फील्ड स्टाफ को विभागीय योजनाओं के साथ नैनो यूरिया की उपयोगिता की जानकारी किसानों तक पहुंचाने को कहा गया है।
रबी की फसलों की मांग को देखते हुए कृषि विभाग ने आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं। संयुक्त निदेशक जैन ने स्पष्ट किया कि यूरिया की निरंतर सप्लाई जारी है और 1600 टन का आवंटन प्राप्त होकर अधिक मांग वाले क्षेत्रों में प्राथमिकता से वितरित किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे वर्तमान मांग अनुसार ही यूरिया क्रय करें। कृषि विभाग ने किसानों से आह्वान किया है कि वे अपनी खड़ी फसलों में नैनो यूरिया व नैनो डीएपी का सही समय पर और सही मात्रा में छिड़काव कर न सिर्फ उत्पादन बढ़ाएं, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखें।
कृषि आयुक्तालय से 50 हजार 100 टन यूरिया की मांगी गई है। अब तक जिले को 26 हजार 128 टन की आपूर्ति की जा चुकी है। वर्तमान में यूरिया 3,969 टन का आवंटन हुआ है। इसके अलावा हमीरगढ़ रैक पॉइंट पर 1600 टन और मिला है।