भीलवाड़ा

Bhilwara: 2 साल की बच्ची के गले में फंसी बैटरी, डॉक्टर्स ने ऐसे बचाई जान

Rajasthan News: दो साल की बच्ची के गले में बटन बैटरी फंसने से उसकी जान पर बन आई। समय रहते परिजन उसे महात्मा गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सफल ऑपरेशन कर बच्ची की जान बचा ली।

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एक्स-रे में दिखाई दे रही गले में फंसी बैटरी तथा रिजिड इसोफैगोस्कोपी के बाद निकाली गई बटन बैटरी (फोटो: पत्रिका)

Battery Stuck In Throat: भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के कान-नाक-गला (इएनटी) विभाग और एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए दो वर्षीय बच्ची की जान बचा ली। बच्ची ने खेलते-खेलते गलती से बटन बैटरी निगल ली थी, जो उसकी भोजन नली में फंस गई थी। परिजनों ने बच्ची को तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

जानकारी के अनुसार कोटड़ी क्षेत्र के रेडवास ग्राम निवासी दो साल की देवांशी ने मंगलवार सुबह बटन बैटरी निगल ली थी। डॉक्टरों ने जांच के लिए एक्स-रे कराया, जिसमें बैटरी के इसोफेगस में फंसे होने की पुष्टि हुई।

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इसके बाद इएनटी विभाग के प्रमुख विशेषज्ञ डॉ. ओपी शर्मा, कनिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह लखावत, सीनियर रेजिडेंट डॉ. अदिति पारीक, रेजिडेंट डॉ. अर्पित पाटनी और प्रियंवदा कंजोलिया ने तुरंत रिजिड इसोफैगोस्कोपी प्रक्रिया कर बैटरी को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।

डॉक्टरों ने बताया कि बटन बैटरी निगलना छोटे बच्चों के लिए अत्यंत खतरनाक होता है। इससे भोजन नली में गंभीर जलन, अल्सर या छेद तक हो सकता है। समय पर उपचार मिलने से बच्चे को किसी प्रकार की गंभीर क्षति नहीं हुई और अब उसकी हालत सामान्य है।

एनेस्थीसिया विभाग से सहायक आचार्य डॉ. महेंद्र बैरवा और उनकी टीम ने प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नर्सिंग स्टाफ में सत्यनारायण तथा वार्ड बॉय भंवर कोली ने भी सहयोग किया।

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Published on:
11 Mar 2026 01:15 pm
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