
भीलवाड़ा। तीन दिनों तक शहर की गलियों में जिन मासूम चेहरों की तलाश तस्वीरों के सहारे चल रही थी, मंगलवार शाम उनका अंत पूरे शहर का कलेजा छलनी कर गया। पालड़ी तालाब के मटमैले पानी से जब दस वर्षीय दिव्यांश उर्फ डग्गू और तेरह वर्षीय रजत के बेजान व क्षत-विक्षत शरीर बाहर निकाले गए, तो हर उम्मीद आंसुओं में बह गई।
खबर कलकीपुरा मोहल्ले में पहुंचते वहां सन्नाटे को चीरता हुआ ऐसा करुण क्रंदन फूटा कि हर किसी की आंखें छलक उठीं। दूसरी ओर, पुलिस की कार्यप्रणाली पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए भड़के परिजनों व नागरिकों का गुस्सा भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी पर फूट पड़ा। देर रात तक आक्रोशित लोग पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरने पर डटे रहे।
दिव्यांश जिसे दोस्त और घरवाले प्यार से डग्गू कहकर पुकारते थे, उसकी मां, पिता हेमंत सोनी और दोनों बहनें खबर सुनकर बेसुध हो गईं। बिलखती मां बार-बार एक ही रट लगाए जा रही थी कि काश पुलिस समय रहते उनके लाल को ढूंढ लेती। दूसरी ओर, रजत का पालन-पोषण करने वाली उसकी वृद्ध दादा- दादी का रो-रोकर बुरा हाल था। दोनों बच्चे हमेशा साथ ही खेलते थे, पढ़ते थे और रविवार दोपहर को भी अपने एक तीसरे साथी के साथ हंसते-खेलते साइकिल पर निकले थे। तीनों सीसीटीवी कैमरे में भी साथ नजर आए थे, लेकिन किसे मालूम था कि यह मासूमों की आखिरी टोली साबित होगी।
रविवार दोपहर से लापता तेरह वर्षीय रजत और दस वर्षीय दिव्यांश की तलाश में पुलिस प्रशासन मॉनिटरिंग कर रहा था। जांच के दौरान जब सीसीटीवी में दोनों बालकों को एक तीसरे साथी के साथ साइकिल पर देखा गया, तो कड़ी जुड़ती चली गई। भीमगंज थाना प्रभारी,सुनील चौधरी ने तीसरे साथी और उसके पिता से सख्ती से पूछताछ की, तो मासूमों के गायब होने का सच सामने आया। उसने बताया कि रविवार को वे तीनों पालड़ी के पास तालाब पर गए थे, जहां दिव्यांश और रजत नहाने पानी में उतरे और वह खुद डरकर साइकिल लेकर अकेला लौट आया।
तीसरे साथी से सुराग मिलते ही एसपी राणा, एएसपी राजेश आर्य और सीओ सिटी सज्जन सिंह पालड़ी तालाब पहुंचे। तालाब के किनारे मासूमों के कपड़े पड़े थे। पानी में तलाशी ली तो दोनों के शव बाहर निकले, जो तीन दिन पानी में रहने के कारण सड़-गल चुके थे। एफएसएल टीम ने भी मौका मुआयना किया।
जैसे ही दोनों मासूमों के शवों को रात को मोर्चरी पहुंचाया, बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए। परिजनों और करीबियों का गुस्सा फूट पड़ा। रिश्तेदारों का आरोप था कि यदि पुलिस समय रहते तीसरे साथी से सख्ती से पूछताछ कर लेती, तो उनके मासूमों के शवों की यह दुर्दशा न होती। आक्रोशित लोग पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गए। माहौल गर्माता देख कोतवाली प्रभारी हनुमान सिंह और गांधीनगर थाना प्रभारी पुष्पा कासोटिया मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत किया। दोनों मासूमों के शवों का पोस्टमार्टम बुधवार को होगा।