भीलवाड़ा

Bhilwara: सरकारी जमीन पर चल रहा निजी स्कूल, तहसीलदार कोर्ट ने दिया बेदखली आदेश, लगाया 104 रुपए जुर्माना

Illegal School Operation: भीलवाड़ा जिले के बिजौलियां में प्रशासनिक उदासीनता, लापरवाही और रसूखदारों से मिलीभगत के चलते बेशकीमती सरकारी भूमि पर अतिक्रमियों का कब्जा बरकरार है। तहसीलदार कोर्ट ने सरकारी जमीन खाली करने का फैसला दिया लेकिन 3 महीने बाद भी यहां निजी स्कूल संचालित हो रहा है।
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Government land encroachment Bhilwara
भीलवाड़ा में सरकारी जमीन पर कब्जा कर चल रहा निजी स्कूल, पत्रिका फोटो

Illegal School Operation: प्रशासनिक उदासीनता, लापरवाही और रसूखदारों से मिलीभगत के चलते भीलवाड़ा जिले के बिजौलियां में बेशकीमती सरकारी व चरागाह भूमि पर अतिक्रमियों का कब्जा बरकरार है। प्रशासन की 'कागजी सख्ती' के आगे जमीनी हकीकत आज भी शून्य बनी हुई है।

यह मामला ग्राम बिजौलियां कलां का है, जहां न्यायालय तहसीलदार बिजौलियां की ओर से 3 महीने पहले बेदखली का आदेश जारी करने के बावजूद आज तक सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर मौके पर चल रहे निजी स्कूल का कब्जा नहीं हटाया जा सका है। धारा 91 के इन आदेशों की पालना न होने से अब प्रशासन की साख पर बट्टा लग रहा है।

यह है पूरा मामला

बिजौलियां कलां की बेशकीमती बिलानाम आराजी नंबर 856 पर अतिक्रमी राजेश कुमार और लोकेश कुमार पुत्र शिवनन्दन पुरोहित ने कब्जा कर रखा है। अतिक्रमियों ने इस सरकारी जमीन पर 15 कमरों का एक बड़ा पक्का निर्माण खड़ा कर लिया। पटवारी की रिपोर्ट अनुसार रसूखदारों ने इस अवैध निर्माण को जनसेवार्थ या गरीबों के हित में उपयोग करने के बजाय, कमलेश पुत्र देवीलाल धाकड़ नामक व्यक्ति को किराए पर दे दिया।

इस सरकारी जमीन पर वर्तमान में एक निजी स्कूल का संचालन हो रहा है। पटवारी के आधार पर ही सरकारी जमीन पर अवैध रूप से यह स्कूल संचालित हो रहा है, जिसने इस पूरे खेल में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर इस अवैध निर्माण और संचालन के लिए किसकी जवाबदेही तय होगी।

तहसीलदार ने दिए बेदखली व शास्ति आदेश

दोनों पक्षों की सुनवाई और पटवार हल्का की रिपोर्ट के बाद, तहसीलदार न्यायालय बिजौलियां तहसीलदार ललित कुमार डीडवानिया ने 24 फरवरी 2026 को फैसला सुनाया था। न्यायालय ने स्पष्ट माना कि पूरी 4.03 बीघा भूमि पर अतिक्रमियों का अवैध कब्जा है। कोर्ट ने राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 91(3) के तहत इन्हें अतिक्रमी घोषित कर भूमि से बेदखल करने और कब्जा राज (सरकारी) करने के आदेश जारी किए थे। इसके साथ ही, वार्षिक लगान का 50 गुना यानी 104 रुपए का जुर्माना लगाया था।

कलक्टर तक पहुंचा मामला

तहसीलदार कोर्ट के इस फैसले को 3 महीने से ज्यादा समय हो बीत चुका है, लेकिन धरातल पर पालना के नाम पर एक ईंट तक नहीं हटाई गई। प्रशासनिक ढिलाई से क्षुब्ध होकर रामप्रसाद ने 8 मई 2026 को जिला कलक्टर भीलवाड़ा को एक शिकायत भेजी है। शिकायत में कहा कि तहसीलदार न्यायालय के 24 फरवरी 2026 के आदेश को शीघ्र लागू करवाकर सरकारी जमीन को मुक्त कराया जाए।

Updated on:
28 May 2026 09:20 am
Published on:
28 May 2026 09:20 am
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