पत्रिका ने किया था मामला उजागर: महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी लगे कार्यकर्ताओं को मैनेज करने में सरकार ने एक साल पहले माना था कि केंद्रों को नहीं दे रहे पूरा किराया
Bhilwara news : आंगनबाड़ी केंद्र का किराया कार्यकर्ताओं व सहायिका की जेब से देने का मामला राजस्थान पत्रिका के उजागर करने के बाद महिला एवं बाल विकास में हड़कंप मचा रहा। अधिकारी अब आंगनबाड़ी केंद्र के कार्यकर्ताओं को मैनेज करने में लगे हैं। आंगनबाड़ी केंद्र के किराए को लेकर सरकार ने एक साल पहले ही आदेश दिए थे कि निर्धारित किराया दर के आधार पर भुगतान नहीं किया जा रहा है।
राजस्थान पत्रिका के मंगलवार के अंक में सरकार दे रही सिर्फ 750 रुपए, बाकी किराया खुद दे रहे कार्यकर्ता शीर्षक से समाचार को प्रमुखता से प्रकाशित किए। इसे लेकर मंगलवार को दिन भर विभागीय अधिकारियों में हड़कंप रहा।मुख्यालय से भी इस मामले में जबाव तलब किया है।
सरकार ने एक साल पहले दिए थे निर्देश
समेकित बाल विकास सेवाएं निदेशालय के निदेशक रामवतार मीणा ने 8 दिसंबर 2023 को प्रदेश के सभी महिला एवं बाल विकास के उप निदेशक तथा बाल विकास परियोजना अधिकारी को निर्देश दिए थे कि आंगनबाड़ी केंद्र के लिए निर्धारित राशि के अनुसार किराया का भुगतान नहीं हो रहा है।
यह किया था किराया तय
सरकार ने राज्य में ग्रामीण क्षेत्र में किराए के भवनों में संचालित आंगनबाडी केंद्रों के लिए एक हजार रुपए तथा शहरी क्षेत्रों में किराए के भवनों में संचालित आंगनबाडी केंद्रों के लिए राशि 4 हजार रुपए प्रतिमाह भवन किराया तय है। लेकिन अधिकांश जगह निर्धारित दर से किराया भुगतान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में मीणा ने निर्देश दिए थे कि किराए के भवनों में संचालित आंगनबाडी केंद्रों के किराए का भुगतान बढी दर से सुनिश्चित करें। उधर अधिकारियों का तर्क है कि किराया के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग के इंजीनियर की रिपोर्ट के आधार पर ही किराया देने का प्रावधान है। इधर सार्वजनिक निर्माण विभाग का कहना है कि पिछले दो-तीन साल से किसी ने आंगनबाड़ी की रिपोर्ट विभाग से नहीं मांगी है।