
भीलवाड़ा।
नया समेलिया में नगर विकास न्यास का सड़क निर्माण कार्य एसीबी जांच के बाद अटक गया है। इधर, आरोपित अभियंताओं पर कार्रवाई होना तो दूर उन्हें वापस यूआईटी में लगा दिया गया। इसी तरह विजय सिंह पथिक नगर विस्तार में तहसील की जमीन को बिलानाम बता कर उसे आवंटित करने के मामले में भी न्यास अभी तक जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाई है। जबकि न्यास की विभिन्न शाखाओं में आरोपों को लेकर बदले गए अधिकांश प्रभारी और कर्मचारी पुरानी जगह पर आ गए है।
नगर विकास न्यास ने हरणी महादेव मंदिर क्षेत्र से सटे नया समेलिया में 7 फरवरी 2013 को 63 लाख रुपए की लागत से सड़क निर्माण की मंजूरी दी थी। इसका ठेका राजश्री कंस्ट्रक्शन कम्पनी के नाम छूटा। ये निर्माण न्यास के अधिशासी अभियंता महेन्द्र प्रकाश व्यास, सहायक अभियंता ब्रहमालाल शर्मा और कनिष्ठ अभियंता ललित राजपूत की देखरेख में हुआ। इस काम में घटिया निर्माण की शिकायत की गई थी, लेकिन यूआईटी ने कार्रवाई करना तो दूर अनुबंधित कम्पनी को भुगतान भी कर दिया।
यूं हुआ मुकदमा दर्ज
जांच रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने तीनों अभियंताओं के खिलाफ 13 दिसम्बर 2016 को एसीबी की धारा 13 (1) (डी), 13 (2) पीसी एक्ट 1988 के तहत प्रकरण दर्ज किया। इस मामले की जांच अभी ब्यूरो में अटकी है। दूसरी तरफ आरोपित अभियंताओं में तत्कालीन सहायक अभियंता ब्रहलाल शर्मा की नियुक्ति यहां न्यास में हो गई और उन्हें निर्माण कार्य की भी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पथिक नगर को भूले
नगर विकास न्यास ने अपनी जमीन नहीं होते हुए भी विजयसिंह पथिक नगर विस्तार में भूखंड आवंटित कर दिए, ये आराजी जिला प्रशासन ने राजकीय आवास के लिए आरक्षित कर रखी थी, समूचे मामले में हंगामा मचने के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच कराई और दोषी अधिकारी व अभियंता के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा, लेकिन प्रशासन के आदेश भी न्यास की फाइल में बंध गए हैं।
यूआईटी की चुप्पी पर एसीबी को शिकायत
इस सड़क निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री की शिकायत सामने आने पर आरयूआईडीपी ने जांच की और न्यास को खामियां दूर करने को कहा। न्यास ने कोई कार्रवाई नहीं की तो शिकायतकर्ता पूर्व पार्षद ने एसीबी की मदद ली। एसीबी ने बाद में सार्वजनिक निर्माण विभाग की तकनीकी टीम से जांच कराई। जांच के दौरान तकनीकी अधिकारियों के पद का दुरुपयोग, निर्माण एजेंसी से मिलीभगत कर मौके पर घटिया निर्माण कार्य करवाने, मौके पर कम कार्य होने के बावजूद एमबी में अधिक नाप चढ़ाया जा कर इस कार्य पेटे राजकोष को कुल 16 लाख 80 हजार 490 रुपए की हानि पहुंचाने की बात सामने आई। इसी प्रकार मौके पर सीसी की मोटाई 10.50 इंच से 15 इंच के मध्य पाई गई, जबकि ठेकेदार को सीसी का भुगतान 14 से 16 इंच की मोटाई मान कर किया गया।
नया समेलिया मामले की जांच एसीबी कर रही है, नियुक्ति का मामला राज्य सरकार के स्तर का है, पथिकनगर विस्तार मामले में जिला प्रशासन की तरफ से जो आदेश मिलेंगे, इस पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
आशीष कुमार शर्मा, सचिव, नगर विकास न्यास