
Edible Oil Prices: भीलवाड़ा: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में नरमी आई है। लेकिन इसका फायदा आम उपभोक्ता की रसोई तक नहीं पहुंच रहा है। पिछले एक साल में जहां पेट्रोल के दामों में लगभग 10 से 12 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हुई है, वहीं खाद्य तेलों की कीमतों में औसतन 300 रुपए प्रति टिन का भारी उछाल आया है। कूड के दाम गिरने के बावजूद पेट्रोल और खाद्य तेलों में कोई गिरावट न आने से आम जन को भारी आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि खाद्य तेलों की कीमतें सिर्फ क्रूड ऑयल से ही तय नहीं होतीं। बल्कि पैकिंग सामग्री, परिवहन लागत, डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय नीतियां भी इस पर गहरा प्रभाव डालती है। जून 2025 के मुकाबले तीनों प्रमुख खाद्य तेल अब भी काफी महंगे बिक रहे हैं।
बाजार में सोयाबीन तेल 380 रुपए प्रति टिन तक महंगा है। सरसों तेल की कीमतों में भी 350 रुपए प्रति टिन तक की वृद्धि हुई है। फरवरी 2026 की तुलना में जून 2026 तक केवल मूंगफली तेल में ही मामूली राहत देखने को मिली है, लेकिन सोयाबीन और सरसों तेल के दाम इसके उलट बढ़ गए हैं।
पैकिंग और ट्रांसपोर्ट का भारी खर्च
बोतल, ढक्कन, प्लास्टिक जार और पाउच जैसे पैकिंग मैटेरियल पेट्रोलियम आधारित प्लास्टिक से ही तैयार होते हैं। रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान इनकी लागत 40 से 60 प्रतिशत तक बढ़ गई थी। अब कूड ऑयल में नरमी के बावजूद पैकिंग सामग्री टैंकरों के किराए पहले और ट्रक वाले स्तर पर नहीं लौटे हैं।
सबसे बड़े पाम ऑयल उत्पादक देश इंडोनेशिया ने 1 जुलाई 2026 से बी-50 बायोडीजल नीति लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत वहां डीजल में 50 प्रतिशत पाम आधारित बायोडीजल मिलाना अनिवार्य होगा। इससे पाम ऑयल की बड़ी मात्रा घरेलू उपयोग में खप जाएगी और निर्यात के लिए कम मात्रा बचेगी। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ेगा और भारत जैसे देशों को महंगा पाम ऑयल खरीदना पड़ सकता है।
भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा करता है। डॉलर के मजबूत रहने से आयातित तेल महंगा पड़ता है, जिसका सीधा असर थोक और खुदरा बाजार पर दिखाई देता है।
| खाद्य तेल | जुलाई 2025 (₹/टिन) | जुलाई 2026 (₹/टिन) |
|---|---|---|
| मूंगफली तेल | 2400–2470 | 2850–3000 |
| सोयाबीन तेल | 2150–2250 | 2450–2550 |
| सरसों तेल | 2350–2450 | 2700–2850 |
क्रूड ऑयल की कीमतें घटने के बावजूद पैकिंग मैटेरियल और ट्रांसपोर्ट लागत अभी भी ऊंचे स्तर पर है। इसके अलावा इंडोनेशिया की बी-50 नीति और डॉलर की मजबूती से आयात महंगा हो गया है। जब तक इन कारकों में राहत नहीं मिलेगी, तब तक खाद्य तेलों की कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद कम है।
-दिनेश पटवारी, किराणा व्यापारी