Murder And Suicide Case:गृह कलह और कर्ज के दबाव ने एक परिवार को ऐसी त्रासदी में धकेल दिया जिसने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया। बड़ला गांव में पिता ने अपने ही 13 वर्षीय बेटे की हत्या कर खुद भी जान दे दी।
Fahter Killed Son: रिश्तों की मर्यादा जब सनक और अवसाद की भेंट चढ़ती है, तो पीछे सिर्फ चीखें और पछतावा रह जाता है। जिले के बड़ला गांव में शुक्रवार का सूरज खुशहाली नहीं, बल्कि मातम की सुर्खी लेकर उगा। जिस 13 साल के मासूम वंश को उसकी मां ने यह सोचकर पिता के पास भेजा था कि बेटा पढ़-लिखकर परीक्षा देगा, उसे क्या पता था कि वही पिता उसके जीवन की अंतिम परीक्षा लिख देगा।
गृह कलह और कर्ज से परेशान पिता ने अपने ही बेटे की दातली से गला रेतकर हत्या कर दी। उसके बाद खुद ने भी विषाक्त पदार्थ पीकर जान दे दी। घटना से गांव स्तब्ध रह गया। घर में कोहराम मच गया। घटना के समय मृतक की पत्नी पीहर में दो बच्चों के साथ थी।
घटनास्थल का मंजर कलेजा चीर देने वाला था। बड़ला निवासी राधेश्याम वैष्णव ने शुक्रवार तड़के गहरी नींद में सोए 13 वर्षीय पुत्र वंश की दातली से गला रेतकर हत्या कर दी। साक्ष्यों से साफ जाहिर है कि जब पिता राधेश्याम ने सोती हुई हालत में वंश पर 'दातली' से वार किया, तो मासूम जाग गया होगा।
उसने अपने पिता के वार से बचने के लिए हाथ-पैर मारे, संघर्ष किया, शायद रहम की भीख भी मांगी होगी, लेकिन कर्ज और गृह कलह के जुनून में अंधे हो चुके पिता का दिल नहीं पसीजा। गहरे घावों ने वंश की जीवनलीला समाप्त कर दी। बेटे को खामोश करने के बाद राधेश्याम ने खुद भी जहर पीकर अपनी जान दे दी।
सूचना पर पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। राधेश्याम के शव का भीलवाड़ा एमजी चिकित्सालय और वंश के शव का सवाईपुर चिकित्सालय में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम हुआ। वही जिला मुख्यालय से पहुंची एसएफएल की टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए।
पुलिस पड़ताल में सामने आया कि राधेश्याम ने कुछ दिन पहले एक वीडियो बनाकर अपने गांव के ग्रुप में डाला था, जिसमें जिन लोगों को पैसे देने उनके नाम तथा ससुराल पक्ष पर आरोप लगाते हुए अगले दो-तीन दिन में बेटे सहित सुसाइड करने का बात कही थी।
राधेश्याम टेंट व्यवसायी के साथ सौर ऊर्जा समेत कई कार्य करता था। इसके बावजूद उसकी माली हालात खराब थी, कर्ज से डूबा होने से पिता ने भी कर्ज चुकाया। राधेश्याम अकसर पत्नी के साथ झगड़ा करता था। परेशान होकर वह पीहर घट्यावली जिला चित्तौड़गढ़ में करीब तीन माह पहले चली गई थी। वहां दो बेटे, एक बेटी के साथ रह रही थी, बेटा वंश की परीक्षा होने से बड़ला आया था।