
अनिल सिंह चौहान
भीलवाड़ा। राजस्थान में खनिज प्रभावित क्षेत्रों के पर्यावरण को सुधारने और वहां रहने वाले स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए बना डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) अब सरकार और विधायकों के लिए इच्छापूर्ति फंड बन गया है। प्रदूषण, शिक्षा और चिकित्सा जैसे मूल और संवेदनशील मुद्दों को पूरी तरह दरकिनार कर इस भारी-भरकम राशि का उपयोग चहेतों को उपकृत करने, मनपसंद सड़कें बनाने, भवन निर्माण और ऐसी संस्थाओं के लिए किया जा रहा जो खुद वित्तीय रूप से सक्षम हैं।
पड़ताल में सामने आया कि प्रदेश के सभी जिलों में से सर्वाधिक फंड भीलवाड़ा से सरकार के खजाने में जा रहा है, लेकिन इसका सही लाभ उन ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है जो दिन-रात खनन के प्रदूषण और गिरते जलस्तर का दंश झेल रहे हैं।
नियमों के मुताबिक, डीएमएफटी का पैसा अनिवार्य रूप से उन गांवों और ढाणियों में खर्च होना चाहिए जहां खनन के कारण धूल, फेफड़ों की बीमारियां सिलिकोसिस और प्रदूषण की मार है, लेकिन धरातल पर हकीकत इसके उलट है। विधायक अपनी राजनीतिक सुविधा और वोट बैंक को चमकाने के लिए खनिज क्षेत्र से मीलों दूर स्थित इलाकों में भी धड़ल्ले से सड़कों और भवनों के काम करवा रहे हैं।
सिर्फ विधायक ही नहीं, बल्कि पिछली सरकार ने भी इस फंड का मनमाना इस्तेमाल किया। इस फंड से 400 करोड़ रुपए निकाल कर मोबाइल और खाद्य सामग्री (किट) के वितरण में खपा दिए। जिस राशि से प्रदूषण नियंत्रण प्लांट लगने थे और अस्पतालों में वेंटिलेटर आने थे, उसे चुनावी रेवड़ियों की भेंट चढ़ा दिया गया।
डीएमएफटी फंड का मुख्य उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा, शुद्ध पेयजल आपूर्ति और पर्यावरण सुधार करना है। इस फंड का दूसरी जगह उपयोग गलत है। जिन गांवों में लोग प्रदूषण से मर रहे हैं, वहां बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं और जहां खनन का नामोनिशान नहीं है, वहां पैसा बहाया जा रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए।
-बाबूलाल जाजू, प्रदेश प्रभारी, पीपुल्स फॉर एनिमल्स
डीएमएफटी फंड का 70 प्रतिशत उपयोग शिक्षा, चिकित्सा उपकरणों, जल व पर्यावरण पर तथा 30 प्रतिशत राशि का उपयोग खनिज प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण एवं अन्य कार्यों में किया जाता है। भीलवाड़ा में अब तक हुई 14वीं बैठक में सभी कार्य नियमानुसार स्वीकृत किए गए हैं।
-चंद्रभान सिंह भाटी, सचिव, डीएमएफटी, भीलवाड़ा