
Bhilwara : बस कुछ दिन की बात है, फिर लौटकर फिर मरीजों की सेवा में लगेंगे….यह कहकर बारां जिले के छबड़ा में अपने साले के बच्चे के जन्मदिन समारोह में शामिल होने गए मांडल उप जिला अस्पताल के प्रभारी डॉ. सुरेश गजराज का हंसता-खेलता परिवार अब कभी वापस नहीं लौटेगा। साले के घर नए मेहमान की खुशियां मनाईं, बच्चों ने जमकर मस्तक पर तिलक लगाया, केक काटा और खिलखिलाए… लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। वहां से जयपुर लौटते समय कवाई-अटरू मार्ग पर भीषण हादसे ने इस डॉक्टर परिवार की सांसों की डोर हमेशा के लिए तोड़ दी।
मंगलवार को जैसे ही मांडल के शहीद जमना लाल भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय में डॉ. सुरेश गजराज (42 वर्ष), उनकी पत्नी डॉ. शालिनी मौर्य (41 वर्ष), 11 वर्षीय पुत्र स्वप्निल और 4 वर्षीय पुत्री निलिशा की मौत की खबर पहुंची अस्पताल परिसर स्तब्ध रह गया। घटना से साथी डॉक्टरों और कर्मचारियों के आंसू रोके नहीं रुक रहे थे। मांडल और भीलवाड़ा चिकित्सा महकमा शोक में डूब गया।
जानकारी के अनुसार, डॉ. सुरेश का परिवार 19 सितंबर को छबड़ा में अपने साले के बच्चे के जन्मदिन की खुशियों में शामिल होने गया था। दोनों बच्चे स्वप्निल और नन्हीं निलिशा अपने ननिहाल पक्ष के बच्चों के साथ खेलने-कूदने में मग्न थे। मंगलवार सुबह पूरा परिवार खुशमिजाज माहौल में कार से जयपुर के लिए निकला था। लेकिन रास्ते में तेज रफ्तार अनियंत्रित भारी वाहन (बलगर) की चपेट में आने से परिवार ताश के पत्तों की तरह बिखर गया।
अगस्त-2022 में मांडल अस्पताल का पदभार संभालने वाले डॉ. सुरेश गजराज ने अपने चार साल के कार्यकाल में अस्पताल की सूरत बदल दी थी। वे सिर्फ एक प्रभारी नहीं, बल्कि मरीजों के लिए किसी मसीहा थे। उनके मृदुभाषी व्यवहार और निष्काम सेवाभाव का ही नतीजा था कि बीते स्वाधीनता दिवस पर अजमेर में आयोजित संभाग स्तरीय समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया था।
अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि डॉ. सुरेश हर छोटे-बड़े कर्मचारी का ख्याल रखते थे। वार्ड में दाखिल मरीजों से भी वे आत्मीयता से मिलते थे। मंगलवार को पूरे मांडल क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
डॉ. दम्पती का भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल से गहरा नाता रहा है। डॉ. सुरेश गजराज फिजिशियन थे और उनकी पत्नी डॉ. शालिनी मौर्य शिशुरोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) थीं। दोनों ही ग्रुप-2 के तहत एमजी अस्पताल में लगभग एक साल तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान जब डॉ. सुरेश गजराज की पोस्टिंग मांडलगढ़ में थी, तब उन्हें सुवाणा के आयुर्वेद अस्पताल में बनाए क्वारंटाइन सेंटर का इंचार्ज बनाया था।