अब सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को स्कूल जाने से पहले सब्जी-फल के साथ ही दूध भी ले जाना पड़ेगा
भीलवाड़ा।
अब सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को स्कूल जाने से पहले सब्जी-फल के साथ ही दूध भी ले जाना पड़ेगा। सरकार ने मिड-डे मिल के तहत सप्ताह में तीन दिन बच्चों को गर्म दूध पिलाने का निर्णय लिया है। एेसे में अब शिक्षकों की जिम्मेदारी रहेगी कि तय दिनों में बच्चों को दूध पिलाया जाए।
मिड-डे-मील के लिए सरस डेयरी के माध्यम से विद्यार्थियों को सप्ताह में तीन दिन दूध सरस डेयरी की ओर से वितरित किया जाएगा। राज्य सरकार की c के तहत सरस डेयरी ने विभिन्न दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों एवं संघ स्तर से दूध प्रत्येक विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर कार्य योजना को अंतिम रूप दे दिया है।
कलक्ट्रेट स्थित अटल सेवा केंद्र से कलक्टर शुचि त्यागी ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस की समीक्षा बैठक में आवश्यक निर्देश प्रदान किए। अब डेयरी सोसायटी से ही संस्था प्रधान या संबंधित शिक्षक को दूध ले जाना पड़ेगा।
इस मौके पर डीईओ राधेश्याम शर्मा व मीड डे मिल प्रभारी जगदीश प्रजापति ने जानकारी ली। इन्होंने वीसी में सभी उपखंड स्तरीय अधिकारियों को दूध योजना की जानकारी दी।
हर जगह नहीं है समिति
गांवों में करीब एक हजार जगह दूध समितियां है। ये समितियां बड़े गांवों में ही है। एेसे में जो छोटे-छोटे गांवों में स्कूल है उन शिक्षकों को पहले डेयरी समिति पर जाना पड़ेगा। वहां से दूध लेने के बाद बच्चों को पढ़ाने जाएंगे।
ले जाने में आएगी समस्या
गांवों के स्कूलों में बच्चों का दूध ले जाने में शिक्षकों को परेशानी होगी। कारण है कि उन्हें प्रति बच्चे के लिए दो सौ ग्राम दूध ले जाना पड़ेगा। एेसे में कैन भरकर दूध ले जाना पड़ेगा। अब शिक्षकों को इस तरह दूध की व्यवस्था करने में समस्या आएगी।
शहर में मिलेगा पैक्ड दूध
शहरी क्षेत्र के बच्चों को सरस का पैक्ड दूध मिलेगा। यह टोंड क्वालिटी का होगा जो 38 रुपए प्रति लीटर होगा। इसी तरह गांवों में 35 रुपए प्रति लीटर में डेयरियों से खुला दूध खरीदा जाएगा। बच्चों को यह दूध फीका ही पिलाएंगे क्योंकि सरकार ने चीनी का बजट नहीं रखा है। सरकार का तर्क है कि नेचुरल दूध स्वास्थ्य के लिए ज्यादा लाभदायक होता है, इसलिए फीका ही पिलाएंगे।
ढोल बजाकर करेंगे प्रचार
गांवों में दो से नौ जुलाई तक दुग्ध सप्ताह मनाया जाएगा। इसके लिए ढोल बजाकर गांवों में लोगों को जागरूक करेंगे। जनप्रतिनिधियों के साथ गांवों में जुलूस निकालेंगे और अभिभावकों को इस दूध योजना के बारे में बताएंगे। इसके लिए सभी संस्था प्रधानों को पाबंद किया है।