उम्मेदसागर बांध की पाळ पर झाड़-झंखाड़ नींव को खोखला कर रहे हैं
शाहपुरा।
उम्मेदसागर बांध की पाळ पर झाड़-झंखाड़ नींव को खोखला कर रहे हैं। लेकिन जल संसाधन विभाग चादर तानकार सोया हुआ है। पाळ पर बड़े-बड़े पेड़ बांध के लिए घातक हो रहे हैं। इनको नजरअंदाज कर देने से लापरवाही भारी पड़ सकती है। पेड़ों की जड़ों में कीड़े-मकोड़ों और चूहों ने जगह बना ली है। ऐसे में बारिश में पाळ के ढहने या गल्ला लगने की आशंका बनी रहती है। इनकी मरम्मत किए भी अरसा हो गया है। ऐसे में बांध की पाळ को तुरंत मरम्मत करवाने की दरकार है।
नौ दशक पुराना बांध
उम्मेदसागर बांध का निर्माण वर्ष- 1917 में तत्कालीन शाहपुरा नरेश उम्मेदसिंह ने करवाया था। इसे बनाने में तेरह माह का समय लगा। तब इसका खर्च 5 लाख रुपए आया था। वर्तमान में पचास किलोमीटर लम्बी नहरें फैली हुई है। बांध की मरम्मत पर पूरा बजट नहीं मिलने से अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे है।
कभी बुझाता था शाहपुरा की प्यास
शाहपुरा के निकट होने से बांध कस्बे की प्यास बुझाने में प्रमुख योगदान देता था। लेकिन आज इसका पानी सिंचाई के काम में लिया जा रहा है। तेरह फीट भराव क्षमता के बांध से अरनिया रासा, सेवनी, दौलतपुरा, कादी सहना, मिण्डोलिया, कल्याणपुरा, रहड़, बच्छखेड़ा व आरणी सहित कुल १८ गांवों की करीब ९ हजार एकड़ भूमि इस बांध के पानी से सिंचित होती है। बांध के भराव क्षेत्र में एनिकटों का निर्माण होने से जलभराव पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने एनिकटों के आसपास अवैध रूप से कुएं खोद दिए। इंजन से खींचकर पानी चुराया जाता है।
एक नजर में उम्मेद सागर बांध
1917 बांध का
निर्माण
5 लाख रुपए खर्च
9 हजार एकड़ में
होती सिंचाई
13 फीट भराव क्षमता