
भीलवाड़ा।
चुनावी मौसम ने दस्तक दे दी है। जिला निर्वाचन विभाग भी तैयारियों में जुट गया है, लेकिन भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र की चुनावी प्रक्रिया निपटाने के लिए अभी तक स्थाई रिटर्निंग अधिकारी (एसडीएम) नहीं मिल सका। कभी आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों के हाथों में कमान रही तो कभी आरएएस प्रशिक्षु ने चुनावी कमान संभाली। अब सहायक कलक्टर (फास्ट ट्रेक) को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दूसरी तरफ एसडीएम कार्यालय में गत पांच वर्ष में 11 एसडीएम बदले जाने और स्थाई उपखंड अधिकारी नहीं मिलने से सरकारी योजनाओं, पेंशनर्स प्रकरण समेत राजस्व कामों का ढेर लग गया है। भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र शहरी आबादी में होने के साथ ही जिला मुख्यालय का अहम हिस्सा रहा है, लेकिन यहां उपखंड अधिकारी की स्थायी नियुक्ति नहीं की जा रही।
गत पांच वर्ष से यहां आरएएस अधिकारी के बजाए अधिकतर समय आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों के हाथ में ही कमान रही। एेसे में उपखंड कार्यालय के मूल कार्य की रफ्तार मंद हो गई। भीलवाड़ा उपखंड कार्यालय की स्थापना 30 जुलाई 1952 को हुई थी, इसके बाद से अभी तक यहां 55 उपखंड अधिकारी की नियुक्ति हो चुकी है, लेकिन वर्ष 2014 से इस पद पर 10 अधिकारी बदल चुके है और 11 वें अधिकारी के रूप में एसीएम जेपी बैरवा को यहां का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
कार्यालय का रिकार्ड बताता है कि 1 सितम्बर 2014 को आरएएस कुशल कोठारी के तबादले के बाद यहां आरएएस स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति कम और प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति अधिक हुई है। प्रशिक्षु आईएएस अविचल चतुर्वेदी, आशीष मोदी के बाद चिन्मय गोपाल का कार्यकाल 20 जुलाई 2017 से 4 मई 2018 तक रहा। चिन्मय के बाद प्रशिक्षु आरएएस सुनीता यादव ने 4 मई से 12 जून 2018 तक काम संभाला।
जिला निर्वाचन विभाग ने विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी। उपखंड मुख्यालयों पर रिटर्निग अधिकारियों को अहम जिम्मेदारी सौंपी। भीलवाड़ा आरओ का पद रिक्त है। जहाजपुर, मांडल, हमीरगढ़, बदनोर आरओ का पद भी लम्बे समय से खाली है, यहां की व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए अन्य आरओ को जिम्मेदारी दे रखी है।